मॉस्को/ग्राउंड ब्यूरो — रूस की एक गोपनीय शोध प्रयोगशाला में प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी के फैलने और एक कर्मचारी की मौत की खबर ने दुनिया भर की नींद उड़ा दी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना एक ऐसी लैब के भीतर हुई जहां बेहद घातक जीवाणुओं पर शोध किया जा रहा था। एक कर्मचारी की संदिग्ध मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन एहतियाती कदम उठाए गए। इस मामले में लापरवाही के आरोपों और संभावित खुलासों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
घटना के सामने आने के बाद रूस के भीतर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एजेंसियों की सांसें अटक गई हैं। प्रयोगशाला के संपर्क में आए लगभग दो सौ से अधिक लोगों को तुरंत निगरानी में रखा गया है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह जानलेवा बैक्टीरिया लैब के बाहर तक तो नहीं पहुंचा। हालांकि रूसी अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बताने का दावा किया है, लेकिन अंदरखाने के हालात अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।
रूस की लैब में कैसे हुआ प्लेग का यह खतरनाक खेल
इस पूरी घटना ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है कि आखिर उच्च सुरक्षा वाली लैब में ऐसा हादसा कैसे हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कर्मचारी की मौत प्लेग के बैक्टीरिया के संपर्क में आने से हुई है। दैनिक भास्कर और आज तक जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों बताती हैं कि रूस इस मामले से जुड़ी कई अहम जानकारियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लैब के भीतर बरती गई ढिलाई पर अब दुनिया भर की नजरें टिक गई हैं।
इस गंभीर खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने रूस से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी मांगी है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत किसी भी खतरनाक बीमारी के फैलने या लैब लीक की आशंका पर पारदर्शिता बरतना अनिवार्य होता है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों का कहना है कि खतरे का सटीक आकलन करने के लिए रूसी सरकार को बिना किसी देरी के लैब की आंतरिक रिपोर्ट साझा करनी चाहिए ताकि पड़ोसी देशों और पूरी दुनिया को सुरक्षित रखा जा सके।
अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
इस पूरे मामले में अमेरिकी राजनीति भी गरमा गई है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने खुलकर सवाल उठाया है कि क्या रूस किसी तरह का बायोवेपन यानी जैविक हथियार तैयार कर रहा था जो लैब से लीक हो गया। उन्होंने कहा है कि अमेरिका इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है और वे खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस मुद्दे पर सीधी बात करेंगे। ट्रंप के इस बयान ने इस स्वास्थ्य संकट को एक बड़े भू-राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।
दूसरी ओर, आम जनता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या आधुनिक युग में न्यूमोनिक प्लेग जैसी ऐतिहासिक महामारियां दोबारा लौट सकती हैं। बीबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता के कारण इस प्लेग के बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका काफी कम है। फिर भी किसी भी देश की गुप्त प्रयोगशालाओं में ऐसे खतरनाक जीवाणुओं पर होने वाले शोध और सुरक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी फील्ड पड़ताल यह बताती है कि भले ही विशेषज्ञों का एक वर्ग यह मान रहा हो कि न्यूमोनिक प्लेग से तुरंत वैश्विक महामारी फैलने का खतरा कम है, लेकिन रूस का यह मामला जैविक सुरक्षा पर एक बड़ी चेतावनी है। जब तक रूस या डब्ल्यूएचओ की तरफ से पूरी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक दुनिया भर के देशों में अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा। द फ्रीलान्स इस मामले के हर नए अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने आएगा, हम पाठकों तक सबसे पहले सच्चाई पहुंचाएंगे।









