मॉस्को और वाशिंगटन से आ रही ताजा खबरों ने एक बार फिर दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। रूस के साइबेरिया इलाके में मौजूद एक अतिसुरक्षित प्रयोगशाला में काम करने वाली महिला वैज्ञानिक की अचानक मौत हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह कोई खतरनाक बीमारी या प्लेग का नया रूप है। इस बीच अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका रूस की इस स्थिति पर पैनी नजर रखेगा।
घटना के सामने आते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि प्रयोगशाला के अंदर किसी खतरनाक संक्रमण या प्लेग जैसे खतरे के फैलने का अंदेशा है। एहतियात के तौर पर तुरंत कदम उठाते हुए लगभग दो सौ लोगों को आइसोलेशन यानी एकांतवास में भेज दिया गया है। इन सभी लोगों पर लगातार डॉक्टरों की टीम नजर रख रही है ताकि संक्रमण फैलने के किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके। दुनिया भर के तमाम देश इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं यह कोरोना महामारी की तरह कोई बड़ा संकट न बन जाए।
रूसी लैब में क्या हुआ और क्या कहती है सच्चाई?
इस पूरे विवाद के बढ़ने के बाद रूसी प्रशासन और देश की मीडिया ने सामने आकर अपनी सफाई दी है। रूस की तरफ से साफ तौर पर यह दावा किया गया है कि लैबकर्मी की मौत किसी अज्ञात बीमारी की वजह से हुई है, न कि प्लेग की वजह से। रूस का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और किसी भी तरह की महामारी फैलने जैसी कोई बात नहीं है। इसके बावजूद लोगों के मन में वुहान लैब जैसी घटनाओं की यादें ताजा हो गईं और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में ऐसे हादसों का होना और उन पर से पर्दा न उठना लोगों के मन में डर पैदा करता है। रूस की इस गोपनीय लैब में आखिर ऐसा क्या शोध चल रहा था, इसे लेकर अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ भी इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और लगातार रूसी अधिकारियों से ताजा अपडेट मांग रहा है ताकि यह साफ हो सके कि मौत की असली वजह क्या थी।
संबंधित खबरें
अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक सुगबुगाहट
इस रहस्यमयी मौत और संभावित प्लेग के खतरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान बहुत अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए संकेत दिए हैं कि अमेरिका इस बात की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है कि साइबेरिया की लैब में वास्तव में क्या हुआ था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप इस मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी सीधी बातचीत कर सकते हैं। सुपरपावर देशों के बीच इस तरह की स्वास्थ्य आपदाओं को लेकर सतर्कता बरतना आम बात है, लेकिन इससे वैश्विक राजनीति में तनाव भी बढ़ जाता है।
आम जनता और स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी डर का माहौल है कि कहीं उनके इलाके में कोई जहरीली गैस या घातक वायरस न फैल गया हो। प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है और कह रहा है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आइसोलेशन में रखे गए लोगों के मेडिकल टेस्ट किए जा रहे हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी कि इस रहस्यमयी बीमारी का सच क्या है।
वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और आगे की राह
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि दुनिया एक बार फिर से जैविक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। चाहे वह रूस की लैब हो या दुनिया के किसी भी अन्य कोने की शोधशाला, वहां सुरक्षा मानकों का पालन किस तरह हो रहा है, यह बहुत बड़ा सवाल है। कोरोना वायरस के बुरे अनुभवों को भूल पाना दुनिया के लिए आसान नहीं है, इसलिए हर छोटी घटना पर इतना बड़ा हंगामा होना स्वाभाविक है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों को लैब के अंदर की पूरी रिपोर्ट सौंपता है या नहीं। जब तक वैज्ञानिक रूप से मौत की पुख्ता वजह सामने नहीं आती, तब तक यह डर बना रहेगा। हमारी टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया आधिकारिक बयान आएगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।



