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राजनीतिपढ़ने में समय: 4 मिनट

सुल्तानपुर में गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ की पुरानी यादें ताजा, सीताकुंड डूबा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पानी बढ़ने से प्रसिद्ध सीताकुंड घाट पूरी तरह डूब गया है। इससे स्थानीय लोगों को पुरानी बाढ़ के दिन याद आ गए हैं, जब पूरा शहर जलमग्न हो गया था। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•8 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•26
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सुल्तानपुर में गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ की पुरानी यादें ताजा, सीताकुंड डूबा
📷 सुल्तानपुर में गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ की पुरानी यादें ताजा, सीताकुंड डूबा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पानी बढ़ने से प्रसिद्ध सीताकुंड घाट पूरी तरह डूब गया है। इससे स्थानीय लोगों को पुरानी बाढ़ के दिन याद आ गए हैं, जब पूरा शहर जलमग्न हो गया था। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

सुल्तानपुर में इन दिनों गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों के दिलों में एक बार फिर पुराना डर जगा रहा है। नदी का पानी लगातार ऊपर आ रहा है और इसने शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल सीताकुंड को अपनी आगोश में ले लिया है। घाट पूरी तरह पानी में डूब चुका है और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोग सहमे हुए हैं। नदी के इस विकराल रूप को देखकर पुराने लोग पुरानी भयावह बाढ़ के दिनों को याद करने लगे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलस्तर में यह बढ़ोतरी पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही है। पानी का बहाव तेज होने के कारण घाट के पास बने मंदिर और सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि नदी किनारे जाने वाले रास्तों पर पानी भर गया है। जिला प्रशासन ने नदी के आसपास के इलाकों में चेतावनी जारी कर दी है और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

सीताकुंड के डूबने से शहर में बढ़ी चिंता

गोमती नदी के उफान पर आने से सबसे ज्यादा असर सीताकुंड क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग आते हैं। लेकिन पानी भरने के कारण अब आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। दुकानदारों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जलस्तर और बढ़ा, तो पानी रिहायशी इलाकों में भी घुस सकता है। लोग अपने घरों और सामानों की सुरक्षा को लेकर अभी से फिक्रमंद नजर आ रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। बाढ़ खंड के अधिकारी लगातार जलस्तर की माप कर रहे हैं और ऊपरी बांधों से छोड़े जाने वाले पानी की जानकारी ले रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करें। इसके बावजूद पिछले सालों की डरावनी यादें लोगों के मन से निकल नहीं पा रही हैं।

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पुरानी बाढ़ की डरावनी यादें और लोगों का डर

बुजुर्ग लोगों को आज भी वह समय अच्छी तरह याद है जब गोमती नदी ने विकराल रूप धारण किया था। उस दौरान पूरा शहर पानी में डूब गया था और लोगों को महीनों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। खाने-पीने की चीजों की किल्लत हो गई थी और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। वर्तमान हालात को देखकर लोगों को वही पुरानी तबाही एक बार फिर अपनी आंखों के सामने घूमती हुई महसूस हो रही है।

ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच संपर्क टूटने का खतरा भी मंडराने लगा है। कई निचले इलाकों में खेतों और रास्तों पर पानी भरने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। द फ्रीलान्स की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो लोगों ने बताया कि समय रहते अगर पक्के इंतजाम नहीं किए गए तो हालात बिगड़ सकते हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बारिश थमेगी और गोमती का जलस्तर जल्द ही सामान्य होगा ताकि उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।

प्रशासन की मुस्तैदी और आगे की तैयारियां

जिला प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को अलर्ट कर दिया है। नाविकों और गोताखोरों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात करने की तैयारी है। आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें भी लगातार गोमती के तटवर्ती गांवों का दौरा कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए शेल्टर होम तैयार रखे गए हैं।

हालाँकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने लोगों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं। अगर आने वाले दिनों में और बारिश होती है, तो जलस्तर और खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। प्रशासन और स्थानीय लोग दोनों ही इस समय आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और पल-पल की जमीनी हकीकत आप तक पहुंचाता रहेगा।

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