नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल के भीतर इन दिनों सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की चर्चा जोरों पर है। कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेजे जाने के बाद इन दोनों की पहली रात तिहाड़ की सलाखों के पीछे कैसी कटी, इसको लेकर कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों की पहली रात बेहद सादगी और कड़े पहरे के बीच कटी। जेल मैनुअल के नियमों का पालन करते हुए उन्हें शुरुआती घंटों में सामान्य कैदियों की तरह ही रखा गया है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जेल में दाखिल होने के बाद दोनों को रात के समय खाने में जेल का नियमित भोजन यानी दाल, रोटी और साधारण सब्जी परोसी गई। हालांकि कानूनी लड़ाई लड़ने वाले और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले इन चेहरों के लिए जेल का यह भोजन और माहौल पूरी तरह नया और असहज करने वाला था। दिनभर की कानूनी भागदौड़ और अदालती प्रक्रियाओं के बाद जब वे रात को बैरक में पहुंचे, तो उनके सामने रात गुजारने की चुनौती थी। जेल के अंदर की व्यवस्था के तहत उन्हें बिस्तर के नाम पर केवल एक कंबल और चादर मुहैया कराई गई, जिसके सहारे उन्होंने ठंडी फर्श पर अपनी पहली रात काटी।
सुरक्षा कारणों से दोनों को रखा गया अलग-अलग बैरक में
तिहाड़ जेल प्रशासन ने सौरव दास और आशुतोष रांका की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए जेल अधिकारियों ने दोनों को अलग-अलग बैरकों में रखने का फैसला किया। जानकारों का कहना है कि तिहाड़ जैसी बड़ी और संवेदनशील जेल में हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े लोगों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। जेल के भीतर कैदियों के बीच आपसी विवाद, मारपीट और यहां तक कि ब्लेडबाजी जैसी वारदातों का इतिहास रहा है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दोनों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं और उन पर चौबीसों घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा के इन कड़े पहरों के बीच दोनों को जेल के सामान्य वार्ड या उच्च जोखिम वाले वार्ड के नियमों के तहत रखा गया है, जहां सुरक्षाकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं। बैरक के बाहर तैनात संतरी और सुरक्षा गार्ड हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। जेल के अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने पहली रात काफी गुमसुम और तनाव में बिताई। लगातार कानूनी सलाहकारों और अपने वकीलों से संपर्क साधने की कोशिशों के बीच वे जेल के सख्त अनुशासन में ढलने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों और बाहर सुगबुगाहट तेज
तिहाड़ जेल के भीतर सौरव दास और आशुतोष रांका के पहुंचने का असर सिर्फ कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहर की राजनीतिक हलचलों पर भी इसका प्रभाव साफ देखा जा रहा है। हाल के दिनों में सीजेपी और विभिन्न राजनीतिक दलों के संबंधों तथा SIR जैसे मुद्दों को लेकर जिस तरह की चर्चाएं चल रही हैं, उसने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के आगामी चुनावी माहौल के बीच इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के रुख पर भी इस कानूनी कार्रवाई का क्या असर होगा, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है।
जेल के बाहर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में भी इस बात को लेकर चिंता है कि आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी। वकीलों की टीम लगातार कागजी कार्रवाई पूरी करने और जमानत की अर्जी दाखिल करने की तैयारी में जुटी हुई है। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के तहत जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल की इसी व्यवस्था के बीच दिन गुजारने होंगे। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जेल प्रशासन तथा कानूनी जानकारों से मिलने वाले नए अपडेट्स लगातार पाठकों तक पहुंचाती रहेगी।



