नई दिल्ली/कीव — यूक्रेन और रूस के बीच जारी खूनी संघर्ष अब समुद्र और नागरिक बुनियादी ढांचे तक फैल चुका है। यूक्रेन में रूस के लगातार ड्रोन हमलों ने स्थिति को बेहद भयानक बना दिया है। हाल ही में हुए इन हमलों में यूक्रेन के लाखों गाड़ियों और नागरिकों के लिए बेहद अहम दो बड़े पुलों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों से साफ है कि रूस युद्ध के मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर संभव रणनीतिक ठिकाने को तबाह कर रहा है। परिवहन के इन मुख्य रास्तों पर हमले से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
दूसरी तरफ, ब्लैक सी यानी काला सागर में भी युद्ध की आग सुलग रही है और इसका सीधा असर अब अंतरराष्ट्रीय नाविकों पर पड़ रहा है। पिछले अड़तालीस घंटों के दौरान ब्लैक सी में गुजर रहे एक तेल टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन ने हमला कर दिया। इस हमले के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई और आसमान काले धुएं के गुबार से भर गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जहाज पर भारतीय नाविक सवार थे। पिछले कुछ दिनों में इस मार्ग पर जहाजों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
रूसी तट के पास तेल टैंकर पर हमला और 23 भारतीयों का रेस्क्यू
ब्लैक सी में हुए इस ताजा ड्रोन हमले का शिकार बने तेल टैंकर पर कुल तेईस भारतीय नाविक सवार थे। रूसी तट के पास हुए इस हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए। गनीमत यह रही कि समय रहते सभी तेईस भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि युद्ध के क्षेत्र से दूर समुद्र में सफर कर रहे नाविकों की जान कितनी जोखिम में है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने इस इलाके में जहाजों की आवाजाही को लेकर चेतावनी जारी की है, क्योंकि ड्रोन हमलों की जद में आने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
समुद्र में बढ़ते तनाव और लगातार हमलों के बीच भारत की कूटनीति भी सक्रिय हो गई है। भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस लंबे युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ठोस पहल की है। नई दिल्ली की तरफ से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को एक तीन सूत्रीय शांति प्लान भेजा गया है। इस प्लान में बातचीत के जरिए समाधान निकालने और दोनों पक्षों को युद्ध रोकने के लिए मनाने की बात कही गई है। भारत के इस कूटनीतिक कदम से दुनिया भर के देशों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है कि शायद इस विनाशकारी युद्ध का कोई शांतिपूर्ण हल निकल सके।
भारत के तीन सूत्रीय शांति प्लान से जगी युद्ध खत्म होने की उम्मीद
भारत की तरफ से भेजे गए इस तीन सूत्रीय शांति प्लान के मुख्य बिंदुओं पर अब वैश्विक स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। भारत शुरू से ही इस बात पर जोर देता रहा है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत की टेबल पर ही संभव है। दुनिया के कई बड़े देश भारत की इस मध्यस्थता और शांति की पहल का समर्थन कर रहे हैं। पश्चिमी देशों से लेकर एशियाई मंचों तक इस बात की चर्चा है कि भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति ही दोनों युद्धरत देशों को बातचीत की मेज पर लाने में कामयाब हो सकती है।
जमीनी हकीकत यह है कि युद्ध के मैदान में दोनों तरफ से तबाही का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रूसी हमलों से यूक्रेनी शहर और पुल खंडहर में बदलते जा रहे हैं, तो वहीं यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी जहाजों और तेल टैंकरों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे दौर में भारतीय नाविकों का सुरक्षित लौटना राहत की बात जरूर है, लेकिन समुद्री सुरक्षा का संकट अभी टला नहीं है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि जब तक कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं होता, तब तक ब्लैक सी और आसपास के इलाकों में सफर करना हर नाविक के लिए मौत के कुएं में उतरने जैसा ही बना रहेगा।





