कीव/मॉस्को — यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग अब और अधिक भयानक रूप ले चुकी है। युद्ध के मैदान से लगातार आ रही खबरों के मुताबिक, हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं। हाल ही में रूसी सेना ने यूक्रेन के कई महत्वपूर्ण सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर सत्तर से अधिक मिसाइलें दागी हैं। इस बड़े हमले में ग्यारह आम नागरिकों की जान चली गई है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। देश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
इस बीच, ब्लैक सी यानी काला सागर में भी तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों की वजह से एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है। इस हमले के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई, जिसके उठते काले धुएं से आसमान पूरी तरह काला नजर आने लगा। पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर भारतीय नाविकों वाले जहाजों और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में यह तीसरा बड़ा हमला बताया जा रहा है। इन समुद्री हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन के मुख्य पुल क्षतिग्रस्त
जमीनी मोर्चे पर भी तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूक्रेन के कई हिस्सों में रूस के लगातार ड्रोन हमले जारी हैं। ताजा हमलों में लाखों गाड़ियों की आवाजाही के लिए बेहद अहम माने जाने वाले दो बड़े पुलों को निशाना बनाया गया है। इन पुलों पर हुए हमलों से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और राहत सामग्री तथा सेना की आवाजाही में भारी बाधा आ रही है। जानकारों का मानना है कि इन पुलों के टूटने से यूक्रेनी सेना की रसद आपूर्ति और सैन्य रणनीति पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
युद्ध के इस खतरनाक माहौल में यूक्रेन का एक प्रमुख शहर मौत के क्षेत्र में तब्दील हो चुका है। वहां फंसे हुए लोग बेहद भयावह स्थिति का सामना करने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत कर्मियों के लिए इस क्षेत्र तक पहुंचना नामुमकिन सा हो गया है। पीने के पानी, बिजली और भोजन की भारी कमी के कारण आम लोगों का जीवन नर्क बन चुका है। चारों तरफ तबाही के मंजर के बीच लोग किसी तरह सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
यूरोपीय संघ के संभावित प्रतिबंधों से बढ़ी यूक्रेनी चिंताएं
सैन्य मोर्चे के अलावा कूटनीतिक स्तर पर भी यूक्रेन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यूरोपीय संघ में यूक्रेन की एक बेहद प्रमुख वस्तु पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि यह प्रतिबंध लागू होता है, तो युद्ध से पहले ही जर्जर हो चुकी यूक्रेनी अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगेगा। देश की प्रतिक्रिया इस संभावित प्रतिबंध को लेकर बेहद सख्त और गंभीर हो गई है, क्योंकि इससे उनकी आर्थिक रीढ़ पूरी तरह टूटने का अंदेशा जताया जा रहा है।
मैदान पर तैनात हमारे रिपोर्टर्स और अंतरराष्ट्रीय जानकारों के मुताबिक, यह युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रहा है। इसके दायरे में पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार आ चुका है। ब्लैक सी में जहाजों पर हो रहे लगातार हमले वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बज रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कूटनीतिक पहल नहीं हुई, तो मानवीय संकट और अधिक गहरा सकता है।
शीतकाल और ऊर्जा संकट के बीच बढ़ता मानवीय संकट
रूस की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हो रहे हमलों का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन की कमर तोड़ना है। सर्दियों के इस मौसम में बिजली और गैस संयंत्रों के नष्ट होने से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हीटिंग सिस्टम फेल होने की वजह से घरों में रहना मुश्किल हो गया है। अस्पतालों और स्कूलों में भी जनरेटर के सहारे काम चलाया जा रहा है, जिनका ईंधन भी अब तेजी से खत्म हो रहा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि इस जंग में सबसे बड़ी कीमत आम इंसान चुका रहा है। एक तरफ आसमान से बरसती मिसाइलें और ड्रोन हैं, तो दूसरी तरफ आर्थिक बदहाली और भुखमरी का साया है। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए कोई बड़ा और निर्णायक कदम नहीं उठाता, तब तक यूक्रेन की धरती पर खून-खराबा और तबाही का यह सिलसिला यूं ही जारी रहने की आशंका है।




