देश के कई राज्यों में मौसम ने अचानक भयानक रूप ले लिया है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में अचानक तेज आंधी के साथ भारी ओलावृष्टि हुई है। इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और बागवानी को भारी क्षति पहुंची है। आम जनता और स्थानीय किसान इस अचानक आए संकट से बेहद परेशान हैं। प्रशासन की टीमें अब जमीनी स्तर पर नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी दोनों ही जिलों में इस बेमौसम आफत ने सबसे ज्यादा कहर ढाया है। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 8,372 हेक्टेयर कृषि भूमि ओलावृष्टि से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। यहां सेब, आड़ू और नाशपाती जैसे फलों की बागवानी को 70 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हुआ है। उधम सिंह नगर और हरिद्वार जैसे इलाकों में तो ओलावृष्टि का रूप इतना भयानक था कि लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। हरिद्वार में तो आधा किलो वजन तक के बड़े ओले गिरने की सनसनीखेज खबरें सामने आई हैं।
हरिद्वार में गिरे आधा किलो के ओले, गाड़ियों के शीशे और सोलर प्लेटें टूटीं
हरिद्वार और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में आसमान से बरसे इन बड़े ओलों ने भारी तबाही मचाई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ओलों का आकार इतना बड़ा था कि खुले में खड़ी गाड़ियों के कांच चकनाचूर हो गए। छतों पर लगी सोलर प्लेटें और एस्बेस्टस की चादरें भी इन भारी ओलों की मार से टूटकर बिखर गईं। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों और दुकानों के शेड के नीचे छिपने को मजबूर हो गए। इस दौरान कई इलाकों में बिजली के तार और पोल भी उखाड़ गए, जिससे घंटों बिजली गुल रही।
बिजली विभाग और प्रशासनिक अमले ने रातभर मशक्कत कर टूटे हुए पोल और तारों को दुरुस्त किया। बिजली की सप्लाई तो कई जगहों पर बहाल कर दी गई है, लेकिन किसानों के खेतों की तस्वीर अब भी डराने वाली है। उधम सिंह नगर में तेज आंधी के कारण मवेशियों की गोशालाएं तक ढह गईं। गनीमत यह रही कि समय रहते मवेशियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, वरना बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था। आंधी और ओले के इस तांडव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है।
फिरोजाबाद और अन्य जिलों में मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में भी ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर तुषारपात कर दिया है। आलू, सरसों और गेहूं की फसलें खेतों में ही बिछ गई हैं। भारी नुकसान से त्रस्त होकर किसानों ने अब सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत विशेष गिरदावरी कराने और आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर मदद नहीं मिली, तो उनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।
राज्य सरकारों के कृषि विभागों ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को तुरंत सर्वे रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालयों से भी ओलावृष्टि पीड़ित किसानों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि मुआवजा मिलने की लंबी प्रक्रिया से किसान पहले ही डरे हुए हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम ने जब ग्राउंड जीरो का दौरा किया, तो पाया कि कई सुदूर गांवों तक अभी तक राहत टीमें नहीं पहुंची हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और किसानों के सामने खड़े हुए नए संकट
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में पहाड़ी और मैदानी इलाकों में फिर से खराब मौसम की चेतावनी जारी की है। इस ताजा चेतावनी ने किसानों और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं और अधिक बढ़ा दी हैं। खेतों में कटी पड़ी फसलें खुले आसमान के नीचे भीगने की कगार पर हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इनसे निपटने के लिए स्थायी कृषि बीमा योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सख्त जरूरत है।
अंततः, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हुई इस भीषण ओलावृष्टि ने एक बार फिर किसानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। फसलों के भारी नुकसान के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे पर टिकी हैं। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और हम पीड़ितों की आवाज को प्रमुखता से उठाते रहेंगे ताकि उन्हें उनका हक मिल सके।






