नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मेडिकल छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी ने एमबीबीएस के पहले साल के छात्रों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जो छात्र फर्स्ट प्रोफेशनल की परीक्षा में बार-बार फेल हो रहे थे, उन्हें पढ़ाई छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। कमीशन ने ऐसे छात्रों के लिए एक और अतिरिक्त मौका देने का फैसला किया है। इस नए नियम के तहत छात्रों को कुल पांचवां और आखिरी मर्सी अटेम्प्ट मिलेगा।
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले कई छात्र पहले साल की बाधा पार नहीं कर पाते थे। पुराने नियमों के मुताबिक छात्रों के पास परीक्षा पास करने के सीमित मौके होते थे। कई छात्र चार प्रयास बीतने के बाद हमेशा के लिए डॉक्टर बनने का सपना छोड़ देते थे। लेकिन अब एनएमसी के इस नए आदेश के बाद उन सभी छात्रों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है। मेडिकल की पढ़ाई बहुत कठिन होती है और तनाव के कारण कई छात्र शुरुआती दौर में पिछड़ जाते हैं।
दस साल में पूरा करना होगा पूरा मेडिकल कोर्स
एनएमसी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब छात्रों को अपनी पूरी एमबीबीएस की डिग्री पूरी करने के लिए कुल दस साल का समय मिलेगा। पहले यह समय सीमा अलग तरह से तय थी जिससे कई छात्रों को बीच में ही कोर्स छोड़ना पड़ता था। अब छात्र अपनी गति के अनुसार और मानसिक तनाव से दूर रहकर पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पढ़ाई में लापरवाही बरती जाए, लेकिन यह उन छात्रों के लिए एक जीवनदान जैसा है जो किसी कारणवश शुरुआती परीक्षाओं में असफल हो गए थे।
इस पूरे मामले पर पिछले कुछ महीनों से छात्रों और अभिभावकों की तरफ से लगातार मांग उठ रही थी। कई राज्यों के मेडिकल छात्रों ने अदालतों का दरवाजा भी खटखटाया था। अदालत ने भी छात्रों के भविष्य और देश में डॉक्टरों की जरूरत को समझते हुए एनएमसी के इस रुख को सही ठहराया है। कोर्ट की मुहर लगने के बाद अब देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में यह नियम पूरी तरह से लागू हो गया है। कॉलेज प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे छात्रों की पहचान करें और उन्हें परीक्षा में बैठने का मौका दें.
किन्हें मिलेगा इस नई सुविधा का सीधा फायदा
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि इस पांचवें मौके का फायदा आखिर किसे और कैसे मिलेगा। वे सभी छात्र जो फर्स्ट प्रोफेशनल यानी एमबीबीएस के पहले साल की परीक्षा में चार बार असफल हो चुके हैं, वे इस पांचवें मर्सी अटेम्प्ट के पात्र होंगे। इसके अलावा जिन छात्रों का दस साल का कुल समय अभी पूरा नहीं हुआ है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। कॉलेज के डीन और प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पात्र छात्र को इस अतिरिक्त मौके से वंचित न किया जाए।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब कुछ मेडिकल छात्रों और उनके परिवारों से बात की तो उनके चेहरे पर साफ राहत दिखाई दी। छात्रों का कहना है कि शुरुआती साल में भाषा की समस्या, शहर बदलने का तनाव और भारी पाठ्यक्रम की वजह से कई बार पेपर निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सरकार और एनएमसी का यह कदम सचमुच एक वरदान साबित हो रहा है। डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए यह फैसला उनके करियर को बचाने का एक आखिरी मजबूत सहारा बन गया है.
भविष्य की तैयारी और एनएमसी के निर्देश
मेडिकल शिक्षा को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए एनएमसी लगातार नए कदम उठा रही है। लेकिन इसके साथ ही छात्रों की मानसिक सेहत और उनके करियर को बचाना भी उतना ही जरूरी हो गया है। नए सत्र से पहले सभी मेडिकल कॉलेजों को इन नियमों का पालन करने के कड़े निर्देश भेज दिए गए हैं। जो छात्र इस पांचवें मौके का इंतजार कर रहे थे, वे अब अपने संबंधित कॉलेजों के परीक्षा विभाग से संपर्क कर सकते हैं। द फ्रीलान्स की इस विशेष पड़ताल से यह साफ हो गया है कि शिक्षा व्यवस्था अब छात्रों के प्रति थोड़ी और संवेदनशील हो रही है।








