नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। ताजा खबरों के अनुसार अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर पर बहुत बड़ी कानूनी और वित्तीय गाज गिरी है। अधिकारियों ने कंपनी के दो हजार छब्बीस करोड़ रुपये के शेयर और बैंक खाते में मौजूद छह करोड़ से ज्यादा की रकम को पूरी तरह से जब्त कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद उद्योग जगत में और शेयर बाजार में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ समय से लगातार वित्तीय संकट और मुकदमों का सामना कर रहे अंबानी परिवार के लिए यह एक और बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
दूसरी तरफ इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब आठ साल से बंद पड़ी अनिल अंबानी की एक पुरानी टेलीकॉम कंपनी से जुड़े नंबरों का मामला भी गरमाया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी का कामकाज पूरी तरह ठप होने के बावजूद आज भी बयालीस मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन नंबरों का इस्तेमाल आखिर कौन कर रहा है और इसके पीछे किसकी लापरवाही या मिलीभगत है। जांच एजेंसियां इस बात की भी बहुत गहराई से पड़ताल करने में जुटी हुई हैं ताकि सच सामने आ सके।
अनिल अंबानी के बेटे के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर पर कानूनी घेरा
इस बीच परिवार की मुश्किलें सिर्फ कंपनियों और शेयरों तक सीमित नहीं रही हैं बल्कि व्यक्तिगत कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में संबंधित अधिकारियों को एक बहुत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने अधिकारियों से कहा है कि वे उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे के खिलाफ जारी किए गए लुकआउट सर्कुलर यानी एलओसी का पूरा विवरण जल्द से जल्द सामने रखें। इस मामले में लगातार सुनवाई चल रही है और कोर्ट के रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में परिवार के सदस्यों की विदेश यात्रा और अन्य कानूनी मामलों पर काफी सख्ती बरती जा सकती है।
अदालत के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि एलओसी से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज अब जांच एजेंसियों के सामने रखे जाएंगे। इस कानूनी प्रक्रिया से यह साफ हो जाएगा कि आखिर किस आधार पर और किन मामलों में यह लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। अनिल अंबानी के परिवार के लिए यह समय कानूनी मोर्चे पर बेहद संवेदनशील बनता जा रहा है क्योंकि एक तरफ कंपनियों की संपत्ति जब्त हो रही है तो दूसरी तरफ परिवार के सदस्यों पर व्यक्तिगत पाबंदियां भी लग रही हैं।
शेयर बाजार और निवेशकों की बढ़ी चिंताएं
रिलायंस पावर पर हुई इस कार्रवाई का सीधा असर बाजार के निवेशकों पर भी पड़ रहा है। जिन आम लोगों और संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में अपना पैसा लगाया था, वे अब अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर काफी ज्यादा चिंतित दिखाई दे रहे हैं। दो हजार करोड़ से ज्यादा के शेयर जब्त होने के बाद कंपनी की वित्तीय सेहत पर सवालिया निशान लग गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयों से निवेशकों का भरोसा डगमगाता है और कंपनी के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब बाजार के हालात का जायजा लिया तो यह बात सामने आई कि छोटे निवेशक अब बेहद सतर्क हो चुके हैं। वे कंपनी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। हालांकि कंपनी प्रबंधन और कानूनी जानकारों के बीच इस जब्ती को हटाने या इस पर कानूनी राहत पाने के लिए बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है। आने वाले हफ्तों में यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि अदालत और Tribunals इस मामले में क्या नया फैसला सुनाते हैं और अनिल अंबानी इस संकट से कैसे बाहर निकलते हैं।
बंद पड़ी टेलीकॉम कंपनी और एक्टिव नंबरों का अनसुलझा रहस्य
मामले का एक और दिलचस्प पहलू वह पुरानी टेलीकॉम कंपनी है जो पिछले आठ सालों से पूरी तरह बंद पड़ी है। जब कोई कंपनी बिजनेस में ही नहीं है और उसके टावर या सेवाएं बंद हैं, तब भी उसके दर्जनों नंबरों का एक्टिव रहना कई बड़े सवाल खड़े करता है। क्या ये नंबर किसी तकनीकी भूल की वजह से चालू हैं या इनके पीछे कोई और गहरी साजिश छिपी हुई है? टेलीकॉम नियामक और सुरक्षा एजेंसियां अब इस एंगल से भी मामले की जांच कर रही हैं ताकि यह पता चल सके कि इन नंबरों का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है।
हमारी शुरुआती पड़ताल बताती है कि इस तरह की तकनीकी कमियों का फायदा अक्सर गलत लोग उठाने की कोशिश करते हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह साफ हो जाएगा कि बंद पड़ी कंपनी के इन सक्रिय नंबरों का सच क्या है। कुल मिलाकर अनिल अंबानी और उनके कारोबार से जुड़े ये तमाम मामले इस समय देश की सबसे बड़ी सुर्खियों में बने हुए हैं। 'द फ्रीलान्स' इस पूरी खबर पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आगे भी हर अपडेट अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।






