नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय टेलीकॉम जगत में क्रांति लाने वाले रिलायंस जियो के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की एक कॉलेज की शिकायत से जियो का विचार आया था। उस समय इंटरनेट की धीमी रफ्तार और महंगे प्लान्स के कारण युवाओं को बहुत परेशानी होती थी। ईशा ने अपने घर पर इंटरनेट की धीमी गति की शिकायत पिता मुकेश अंबानी से की थी। इसी एक शिकायत ने मुकेश अंबानी की सोच को बदला और देश में डिजिटल क्रांति लाने का बड़ा फैसला लिया गया। आज यही जियो देश के कोने-कोने तक इंटरनेट पहुंचाने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है और इसके करोड़ों ग्राहक हैं।
इस बीच, रिलायंस समूह में उत्तराधिकार और बड़े व्यावसायिक बदलावों का दौर भी तेजी से चल रहा है। कंपनी के आईपीओ से ठीक पहले मुकेश अंबानी ने एक बड़ा दांव चलते हुए अपने बेटे आकाश अंबानी को जियो का नया कप्तान बना दिया है। आकाश अंबानी को पांच साल के लिए जियो का प्रबंध निदेशक यानी एमडी नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर, अनिल अंबानी के कारोबारी सफर और संघर्षों की भी अक्सर तुलना की जाती है कि कैसे गलत फैसलों और भारी कर्ज के कारण वह अपने भाई से पीछे छूट गए। इसके अलावा, हाल ही में व्हर्लपूल को खरीदने के पुराने वाकये और कुछ रूसी अरबपतियों के बयानों ने भी बाजार में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
जियो के आने से बाजार और ग्राहकों पर क्या असर पड़ा?
जब साल 2016 में जियो ने बाजार में कदम रखा था, तब डेटा की कीमतें आसमान छू रही थीं। जियो के आते ही कॉलिंग मुफ्त हुई और इंटरनेट का डेटा बहुत सस्ता हो गया। आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हुआ और हर हाथ में स्मार्टफोन पहुंच गया। छोटे शहरों से लेकर गांवों तक के लोगों ने पहली बार वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन पढ़ाई का अनुभव किया। इस एक बड़े बदलाव ने देश के अन्य सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर कर दिया। आज स्थिति यह है कि भारत दुनिया में सबसे सस्ता और अधिक डेटा इस्तेमाल करने वाले देशों में प्रमुख स्थान रखता है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि मुकेश अंबानी की दूरदर्शी सोच ने रिलायंस को तेल और गैस के कारोबार से आगे निकालकर तकनीक और डिजिटल सेक्टर का सिरमौर बना दिया है। आने वाले समय में जियो का आईपीओ बाजार में एक नया इतिहास रचने की तैयारी में है। आकाश अंबानी के नेतृत्व में कंपनी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 6जी तकनीक की तरफ कदम बढ़ा रही है। इससे ग्राहकों को भविष्य में और भी तेज और सुरक्षित इंटरनेट सेवाएं मिलने की पूरी उम्मीद है।
टेलीकॉम सेक्टर में आगे क्या नई चुनौतियां हैं?
भले ही जियो ने बाजार का बड़ा हिस्सा अपने नाम कर लिया है, लेकिन कंपनियों के सामने अभी कई बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। हर साल स्पेक्ट्रम की नीलामी और नेटवर्क के रख-रखाव पर भारी भरकम खर्च करना पड़ता है। कंपनियों की कोशिश हमेशा यही रहती है कि ग्राहकों की प्रति यूजर कमाई को कैसे बढ़ाया जाए ताकि मुनाफा स्थिर रहे। हाल के दिनों में सभी कंपनियों ने अपने प्लान्स महंगे किए हैं, जिससे आम ग्राहकों की जेब पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है। इसके बावजूद इंटरनेट की जरूरत इतनी बढ़ गई है कि लोग रिचार्ज कराना बंद नहीं कर सकते।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि आने वाले दिनों में डेटा की खपत और अधिक बढ़ने वाली है। लोग अब केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने रोजमर्रा के कारोबार और बैंकिंग के लिए पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों की यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बिना किसी रुकावट के उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं दें। मुकेश अंबानी और उनके परिवार द्वारा उठाए गए ये कदम आने वाले भारतीय डिजिटल भविष्य की रूपरेखा तय कर रहे हैं।









