नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में करोड़ों नौकरीपेशा लोग इन दिनों कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के नए नियमों को लेकर गूगल पर लगातार खोज कर रहे हैं। पिछले कुछ घंटों में इंटरनेट पर इस विषय को लेकर लोगों की दिलचस्पी अचानक बहुत बढ़ गई है। हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या अब पीएफ खाते से पैसे निकालने के नियम बदल गए हैं। हमारी टीम ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की है और यह जानने की कोशिश की है कि आखिर लोग किस बात को लेकर सबसे ज्यादा परेशान हैं।
शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में कई बार तकनीकी दिक्कतें आती हैं। लोग ऑनलाइन पोर्टल पर जब भी अपना यूएएन नंबर डालकर क्लेम करने जाते हैं, तो कई तरह के एरर सामने आ जाते हैं। कभी नाम का मिलान नहीं होता तो कभी कंपनी की तरफ से केवाईसी का काम अधूरा रह जाता है। इन छोटी-छोटी तकनीकी बाधाओं के कारण आम आदमी का पैसा महीनों तक फंसा रहता है। यही वजह है कि लोग ताजा खबरों और नए अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि उन्हें सही जानकारी मिल सके।
पीएफ क्लेम और सेटलमेंट की नई व्यवस्था
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पिछले कुछ समय में अपने सिस्टम को डिजिटल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों का दावा है कि ऑटो-मोड सेटलमेंट शुरू होने से अब इलाज और शिक्षा के लिए एडवांस पैसा बहुत जल्दी मिल जाता है। पहले इस प्रक्रिया में हफ्तों का समय लग जाता था, लेकिन अब कुछ ही दिनों में पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच रहा है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को अभी भी ऑनलाइन पोर्टल चलाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई कर्मचारियों का कहना है कि जब वे खुद से पोर्टल पर फॉर्म भरने की कोशिश करते हैं, तो सर्वर धीमा होने की समस्या आम बात बन गई है। कई बार पासवर्ड रीसेट करने में दिक्कत आती है या फिर आधार और पैन कार्ड का मिलान न होने पर आवेदन रद्द कर दिया जाता है। ऐसे हालात में मजदूरों और कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपने ही पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। विभाग के स्थानीय कार्यालयों में भी कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों की शिकायतें समय पर नहीं सुन पा रही हैं, जिससे आम जनता में नाराजगी है।
नौकरीपेशा लोगों के सामने आ रही मुख्य दिक्कतें
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ विभाग को अपनी तकनीक को और अधिक सरल बनाने की जरूरत है ताकि हर आम आदमी इसे आसानी से समझ सके। अभी भी देश के एक बड़े हिस्से में डिजिटल साक्षरता की कमी है, जिसके कारण लोग अपने मोबाइल फोन से पीएफ निकालने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते हैं। उन्हें इसके लिए जन सेवा केंद्रों या साइबर कैफे जाना पड़ता है, जहां उन्हें अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ते हैं। सरकार और विभाग को इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि सेवाएं पूरी तरह से पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के मिल सकें।
अगर आप भी अपना पीएफ निकालना चाहते हैं या पुरानी कंपनी का पैसा नई कंपनी में ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले अपने यूएएन पोर्टल पर जाकर अपने बैंक खाते, आधार और मोबाइल नंबर की पूरी जांच कर लें। अगर आपके नाम या जन्मतिथि में कोई भी अंतर है, तो उसे समय रहते ठीक करवा लें। छोटी सी गलती भी आपके पैसों को लंबे समय के लिए रोक सकती है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर आगे भी नजर रखेगी और आपको पल-पल की सटीक जानकारी देती रहेगी।
ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
इन दिनों साइबर ठग भी पीएफ खाताधारकों को अपना शिकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे फोन कॉल या मैसेज करके लोगों से उनका यूएएन पासवर्ड या ओटीपी मांगते हैं। विभाग बार-बार चेतावनी देता है कि अपना कोई भी निजी दस्तावेज या पासवर्ड किसी के साथ भी साझा न करें। यदि आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत इसकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराएं। सतर्क रहकर ही आप अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं।









