नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज आज दुनिया भर में अपनी बड़ी पहचान रखती है। इस विशाल कारोबार के पीछे कई दिलचस्प कहानियां जुड़ी हैं, जिनमें से एक बेहद खास कहानी जियो की शुरुआत से जुड़ी है। क्या आप जानते हैं कि भारत के करोड़ों लोगों के हाथ में सस्ता इंटरनेट देने वाले जियो का जन्म एक छोटी सी घरेलू शिकायत से हुआ था। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है लेकिन यह पूरी तरह सच है। खुद मुकेश अंबानी ने एक सार्वजनिक मंच पर इस बात का खुलासा किया था कि उनके घर में हुई एक शिकायत ने देश की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी।
साल 2011 के आसपास की बात है जब मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई कर रही थीं। एक दिन ईशा ने अपने घर फोन किया और पिता मुकेश अंबानी से शिकायत की कि घर आने पर उनका इंटरनेट काम नहीं करता है। ईशा ने बताया कि उनके कॉलेज का वाई-फाई और इंटरनेट बहुत तेज है, लेकिन मुंबई स्थित उनके आलीशान घर एंटिला में इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी है। उस समय भारत में मोबाइल डेटा की स्पीड बहुत कम थी और इंटरनेट का इस्तेमाल करना आम आदमी के लिए काफी महंगा सौदा हुआ करता था। बेटी की इस छोटी सी शिकायत को मुकेश अंबानी ने बहुत गंभीरता से लिया और यहीं से उनके दिमाग में एक बड़ा विचार आया।
धीमी इंटरनेट स्पीड से कैसे हुई जियो की नींव की शुरुआत
बेटी की उस एक शिकायत ने मुकेश अंबानी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर उनके घर में ऐसी परेशानी है तो आम भारतीयों का क्या हाल होगा। उन्होंने महसूस किया कि भारत के पास डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ने की असीम क्षमता है, लेकिन तेज इंटरनेट की कमी इस रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा है। इसके बाद मुकेश अंबानी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान तैयार किया जो आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बना। उन्होंने साल 2010 में ही ब्रॉडबैंड सर्विस प्रोवाइडर इंफोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज का अधिग्रहण कर लिया था, लेकिन असली रूप में काम साल 2011 के बाद तेजी से आगे बढ़ा। मुकेश अंबानी ने तय कर लिया कि वे भारत के हर कोने में सस्ता और तेज इंटरनेट पहुंचाएंगे ताकि किसी भी युवा को इंटरनेट की धीमी स्पीड से परेशान न होना पड़े।
इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चुपचाप अपनी तैयारी शुरू कर दी और साल 2016 में रिलायंस जियो को आधिकारिक तौर पर बाजार में उतार दिया गया। जियो के आते ही भारतीय टेलीकॉम बाजार में भूचाल आ गया क्योंकि कंपनी ने शुरुआत में कई महीनों तक मुफ्त वॉयस कॉल और डेटा देना शुरू किया। इस एक बड़े दांव ने देश के करोड़ों लोगों को पहली बार स्मार्टफोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करना सिखाया। जो डेटा पहले बहुत महंगे दामों पर मिलता था, वह जियो के आने के बाद पानी के भाव मिलने लगा। देखते ही देखते भारत डेटा खपत के मामले में दुनिया के सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल हो गया। आज के समय में शिक्षा, मनोरंजन और कारोबार से लेकर हर क्षेत्र में जो डिजिटल बदलाव दिख रहा है, उसकी नींव में वही पुरानी पारिवारिक शिकायत है।
परिवार में विरासत का बंटवारा और नया दौर
वक्त के साथ अंबानी परिवार ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को कमान सौंपनी शुरू कर दी है। हाल ही में मुकेश अंबानी ने अपने बड़े बेटे आकाश अंबानी को जियो का नया कप्तान बनाते हुए पांच साल के लिए प्रबंध निदेशक यानी एमडी पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी खुद रिलायंस रिटेल के कामकाज को संभाल रही हैं और हाल ही में उन्होंने 'आ जियो ब्यूटी' नाम से एक नया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। परिवार के ये युवा चेहरे अब रिलायंस के साम्राज्य को डिजिटल और रिटेल दोनों मोर्चों पर नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। एक समय जो कंपनी केवल पेट्रोकेमिकल और ऑयल रिफाइनरी के लिए जानी जाती थी, वह आज टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम और रिटेल की दुनिया की बादशाह बन चुकी है।
दूसरी तरफ अंबानी परिवार के इतिहास में कुछ ऐसे अध्याय भी हैं जो कारोबार जगत के लिए एक बड़ा सबक बने हुए हैं। मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी के कारोबार में आई गिरावट और कर्ज के दलदल में फंसने की कहानियां आज भी व्यापार जगत में पढ़ाई जाती हैं। सही समय पर सही फैसले लेने की कला ने मुकेश अंबानी को दुनिया के शीर्ष उद्योगपतियों में ला खड़ा किया, जबकि कुछ गलत रणनीतियों ने अनिल अंबानी के व्यवसायों को पीछे छोड़ दिया। आज मुकेश अंबानी का परिवार न सिर्फ भारत का बल्कि दुनिया का एक बहुत बड़ा आर्थिक स्तंभ बन चुका है। और इस पूरे सफर की सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस डिजिटल क्रांति ने भारत के 50 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी बदली, उसकी शुरुआत एक बेटी की छोटी सी इंटरनेट शिकायत से हुई थी।
भविष्य की रणनीति और जियो का अगला बड़ा कदम
आज जियो सिर्फ एक फोन कंपनी नहीं रह गई है बल्कि यह भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुकी है। कंपनी आने वाले समय में अपने आईपीओ लाने की तैयारी में भी जुटी है जिससे निवेशकों को बाजार में एक और बड़ा मौका मिलेगा। आकाश अंबानी और ईशा अंबानी की यह जोड़ी अपने पिता के दिखाए रास्ते पर चलते हुए हर घर तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का काम कर रही है। ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक आज हर कोई ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई और मनोरंजन के लिए जियो के नेटवर्क पर निर्भर है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि एक दूरदर्शी सोच और परिवार की छोटी सी बात कैसे देश के इतिहास को हमेशा के लिए बदल सकती है।







