कोलकाता/ग्राउंड ब्यूरो — कोलकाता पुलिस इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। शहर की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और आम जनता को जागरूक करने के लिए पुलिस प्रशासन ने कई बड़े कदम उठाए हैं। पिछले चौबीस घंटों में सामने आए घटनाक्रम बताते हैं कि पुलिस एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही है। चाहे वह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला हो या फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना बिलबोर्ड विवाद, पुलिस की हर गतिविधि पर सबकी नजर है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा बलों और प्रशासनिक सुधारों को लेकर लगातार नए अपडेट सामने आ रहे हैं।
राजधानी कोलकाता में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने एक महीने लंबा विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकना और लोगों को साइबर ठगी के खतरों से आगाह करना है। पुलिस के अधिकारी शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। खासकर सोशल मीडिया पर होने वाले फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों से बचने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि जागरूकता से ही आधे से ज्यादा अपराधों को रोका जा सकता है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और बिलबोर्ड मामला
एक तरफ जहां पुलिस जनहित के अभियानों में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ हाई-प्रोफाइल मामलों में भी जांच तेज कर दी गई है। चर्चित बिलबोर्ड मामले में कोलकाता पुलिस की टीम लगातार दूसरे दिन तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को नोटिस देने उनके आवास पर पहुंची। इस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्षी दल और सत्ताधारी पार्टी आमने-सामने हैं। पुलिस इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है और सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन के मामले में कानून अपना काम कर रहा है।
आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने शहर और आसपास के इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी है। हाल ही में बंगाल पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो चोरी की बाइकों का इस्तेमाल करके लोगों के मोबाइल फोन छीनते थे। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान इक्यावन (51) छीने गए मोबाइल फोन बरामद किए और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और राह चलते लोगों को अपना निशाना बनाता था। पुलिस अब इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था और बल में नई भर्तियां
कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पुलिस बल का सुदृढ़ होना बहुत जरूरी है। इसी कड़ी में हाल ही में ग्यारह हजार पांच सौरानवे (11,593) पुलिस कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं। नए जवानों के शामिल होने से थानों और पुलिस चौकियों में बल की कमी दूर होगी। जानकारों का मानना है कि नए जवानों की तैनाती से गश्त बेहतर होगी और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। सरकार का यह कदम राज्य में रोजगार और सुरक्षा दोनों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल से सटी अन्य खबरों में बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में होने वाली घटनाओं पर भी लोग चिंता जता रहे हैं। हाल ही में एक शिक्षक द्वारा मामूली बात पर दो साल के बच्चे को जमीन पर पटकने का मामला सामने आया है, जिससे बच्चे का पैर टूट गया। इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि पुलिस ऐसे मामलों में तुरंत संज्ञान ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आम जनता भी अब पुलिस से यह उम्मीद कर रही है कि वह बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच करे और कानून का राज स्थापित करे।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी मैदानी पड़ताल यह बताती है कि कोलकाता पुलिस के सामने इस समय जनता का भरोसा जीतने और अपराधों पर नियंत्रण पाने की दोहरी चुनौती है। एक तरफ जहां महिला सुरक्षा और साइबर जागरूकता जैसे सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं राजनीतिक मामलों में निष्पक्षता बनाए रखना भी बड़ी परीक्षा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इन सभी अभियानों को कितनी सफलता के साथ जमीन पर उतार पाती है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और हर नया अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाती रहेगी।











