नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में आयोजित भारतीय मोबाइल कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल तकनीक और गवर्नेंस को लेकर बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि आज मोबाइल फोन केवल बात करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह सुशासन और पारदर्शिता का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। सरकार की योजनाओं का पैसा सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे बीच में लीकेज पूरी तरह रुक गई है। इस पूरी डिजिटल व्यवस्था के कारण देश के लगभग पांच लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बच गए हैं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का पैसा बिचौलियों की जेब में जाता था और जनता हक के लिए भटकती थी। अब बैंक और अस्पताल जैसी जरूरी सेवाएं लोगों के फोन की स्क्रीन पर एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। इस व्यवस्था के बदलने से उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनकी बिना मेहनत की कमाई बंद हो गई है। प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जिनकी मुफ्त की कमाई का रास्ता बंद हो गया है, वे भला इस बदलाव से कैसे खुश हो सकते हैं?
फेस्टिव सीजन में यूपीआई पेमेंट और बाजार का हाल
दूसरी तरफ देश के डिजिटल भुगतान बाजार में फेस्टिव सीजन को लेकर बड़ी राहत की खबरें सामने आ रही हैं। बाजार में यह साफ किया गया है कि यूपीआई पेमेंट पूरी तरह फ्री रहेगा और दो हजार रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर किसी तरह का कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के बाद आम आदमी और छोटे दुकानदारों ने चैन की सांस ली है। त्योहारी सीजन के दौरान लोग बिना किसी झंझट के डिजिटल माध्यम से धड़ल्ले से खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह भी तेजी से बढ़ रहा है।
इसी बीच तकनीक और व्यापार के मोर्चे पर एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा को लेकर भी सरकार की तरफ से स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है। सरकार ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि देश के बड़े कारोबारी विदेशी कंपनियों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। संचार मंत्रालय और सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि देश में नियम सभी के लिए एक समान हैं और जो भी कंपनी तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी, उसे कारोबार करने की पूरी छूट मिलेगी।
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट और आम खरीदार
तकनीक और डिजिटल सुधारों के बीच सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं के दाम में मामूली नरमी देखने को मिली है। सोना और चांदी के भाव में गिरावट आने से उन आम ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है जो इस त्योहारी और शादी के सीजन में खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद कुल बजट पर महंगाई का असर अब भी बना हुआ है, लेकिन डिजिटल छूट और कैशबैक ऑफर्स ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब जमीनी स्तर पर पड़ताल की तो पाया कि छोटे शहरों और गांवों तक में लोग अब फोन पर अस्पताल की अपॉइंटमेंट बुक करने लगे हैं। जनधन खातों से लेकर आधार और मोबाइल के इस त्रिकोण ने भ्रष्टाचार की जड़ों पर सीधा प्रहार किया है। ग्रामीण इलाकों के आम नागरिक भी अब डिजिटल पेमेंट और सरकारी पोर्टल का इस्तेमाल बहुत आसानी से करने लगे हैं, जो प्रशासनिक सुधारों की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
भविष्य की डिजिटल राह और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आने वाले दिनों में सरकार का पूरा फोकस साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को और ज्यादा मजबूत करने पर है। जैसे-जैसे देश का हर नागरिक फोन के जरिए बैंकिंग और सरकारी सेवाओं से जुड़ रहा है, वैसे-वैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के उपाय भी सख्त किए जा रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि तकनीक ने आम आदमी की जिंदगी को भले ही बेहद आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ डिजिटल साक्षरता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी हो गया है ताकि कोई भी ग्रामीण या बुजुर्ग ऑनलाइन ठगी का शिकार न बने।





