नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के व्यापारिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा सबसे ऊपर है कि क्या भारतीय बाजार में दो सबसे बड़े दिग्गजों के बीच सीधी टक्कर होने वाली है। दुनिया के अमीर कारोबारी एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट और अन्य डिजिटल सेवाओं की भारत में एंट्री पर अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपनी मजबूत स्थिति साफ कर दी है। रिलायंस की तरफ से दो टूक कह दिया गया है कि वे किसी से भी डरते नहीं हैं और बाजार में हर नए कंपटीशन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत का डिजिटल और टेलीकॉम बाजार दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता मैदान बन चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रिलायंस की सालाना आम बैठक यानी एजीएम में कई बड़े और दूरगामी एलान किए गए हैं। कंपनी ने अपने बहुप्रतीक्षित जियो आईपीओ को बोर्ड की मंजूरी मिलने की आधिकारिक घोषणा कर दी है और इसके लिए जरूरी दस्तावेज भी फाइल कर दिए गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जियो का यह कदम भारतीय शेयर बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है। इसके साथ ही मुकेश अंबानी ने न्यू एनर्जी सेक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब यानी एआई हब पर भारी निवेश का खाका खींचा है। इन सभी बड़े फैसलों से निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और ब्रोकरेज फर्मों ने रिलायंस के शेयरों के लिए ऊंचे टार्गेट तय किए हैं।
रिलायंस के इन बड़े फैसलों से शेयर बाजार में क्यों मची हलचल?
मुकेश अंबानी ने हमेशा से भविष्य की तकनीक को समय से पहले भांपने का काम किया है। चाहे बात जियो के जरिए देश के कोने-कोने तक सस्ता इंटरनेट पहुंचाने की हो या फिर ग्रीन एनर्जी और एआई सेक्टर में उतरने की, रिलायंस हर मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। हाल ही में कंपनी के एजीएम में निवेशकों को बताया गया कि जियो का आईपीओ आने वाले समय में रिलायंस की वैल्यू को और ज्यादा बढ़ाने का काम करेगा। इसके अलावा सोलर एनर्जी, हाइड्रोजन फ्यूल और आधुनिक डेटा सेंटर्स पर काम तेजी से चल रहा है। इन तमाम घोषणाओं के बाद से बाजार के जानकारों का कहना है कि रिलायंस के शेयर लंबी अवधि में बड़ा मुनाफा दे सकते हैं और इसके लिए 1765 रुपये तक के टार्गेट भी सुझाए गए हैं।
लेकिन इस सफलता के सफर में रिलायंस का इतिहास भी सीख देता है कि हर दांव हमेशा एक जैसा नहीं रहा। मुकेश अंबानी ने अतीत में एविएशन यानी विमानन सेक्टर में भी अपना हाथ आजमाया था और डेक्कन 360 जैसी एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। हालांकि, बाजार की बदलती परिस्थितियों और भारी घाटे के चलते कंपनी ने उस क्षेत्र से समय रहते किनारा कर लिया था। उस पुराने अनुभव से सीख लेते हुए आज रिलायंस किसी भी नए सेक्टर में उतरने से पहले बेहद ठोस और पुख्ता रणनीति तैयार करती है। एलन मस्क की कंपनियों के साथ संभावित टक्कर को भी इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है जहां रिलायंस अपने घरेलू बाजार की ताकत और बड़े यूजर बेस के दम पर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुकेश अंबानी की दूर की सोच और बिजनेस के पांच बड़े सबक
देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह को खड़ा करने वाले मुकेश अंबानी के कामकाज के तरीकों पर हमेशा से देश-दुनिया के युवाओं और कारोबारियों की नजर रहती है। उनकी सफलता के पीछे मुख्य रूप से पांच ऐसे गुण हैं जो किसी भी आम इंसान को एक बड़ा कारोबारी बना सकते हैं। पहला गुण है दूर की सोच, यानी आज से दस साल आगे की तकनीक को आज ही पहचान लेना। दूसरा गुण है किसी भी चुनौती से घबराने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करना, जैसा कि उन्होंने एलन मस्क को हालिया चुनौती में जवाब देकर साबित किया है। तीसरा गुण है समय पर कड़े फैसले लेना और चौथा गुण है अपने ग्राहकों की जरूरत को सबसे ऊपर रखना।
पांचवां और सबसे अहम गुण यह है कि कंपनी हमेशा अपने पुराने गलत फैसलों से सीख लेकर आगे बढ़ती है, जैसे कि एविएशन सेक्टर से बाहर निकलने का फैसला। आज जब देश में डिजिटल क्रांति अपने चरम पर है, तो जियो और रिलायंस का हर एक कदम सीधे तौर पर आम आदमी की जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। चाहे वह सस्ता डेटा हो, आने वाले समय का सैटेलाइट इंटरनेट हो या फिर एआई आधारित तकनीक, मुकाबला चाहे जिससे भी हो, इसका सीधा फायदा देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को मिलने वाला है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में तकनीकी कंपनियों के बीच यह महासंग्राम और अधिक दिलचस्प होने वाला है।





