नई दिल्ली/रियाद — सऊदी अरब की कानून व्यवस्था और धार्मिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ वहां की अदालत ने सबसे कड़ा फैसला सुनाया है। खाड़ी देश सऊदी अरब में एक बांग्लादेशी जोड़े को मौत के घाट उतार दिया गया है। इस जोड़े पर दुनिया के सबसे पवित्र इस्लामी स्थल मक्का की एक मस्जिद के भीतर अश्लील और अनैतिक हरकतें करने का गंभीर आरोप साबित हुआ था। विदेशी धरती पर कानून का उल्लंघन करने वाले प्रवासियों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आया है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना कुछ महीने पहले मक्का की एक मशहूर मस्जिद के अंदर घटी थी। आरोपी बांग्लादेशी पति-पत्नी ने मस्जिद परिसर की पवित्रता को ताक पर रखकर कथित तौर पर अश्लील कृत्य किया था। इस घटना का वीडियो या तस्वीरें किसी तरह सामने आने के बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत हरकत में आते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। खाड़ी देशों में सार्वजनिक स्थलों और विशेषकर धार्मिक स्थलों पर शालीनता और नियमों का पालन न करने पर बेहद सख्त सजा का प्रावधान है। इसी कड़ी में मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई जिसे हाल ही में अमल में लाया गया है।
मक्का की मस्जिद में अश्लीलता पर सऊदी प्रशासन का कड़ा रुख
सऊदी अरब का कानून धार्मिक मामलों और सार्वजनिक मर्यादा के प्रति जरा भी ढील नहीं बरतता है। मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित होने के साथ-साथ सभी आगंतुकों और प्रवासियों के लिए कड़े आचार संहिता के नियम लागू हैं। बांग्लादेशी कपल द्वारा मस्जिद के अंदर किए गए इस अवांछित कृत्य को वहां की न्याय व्यवस्था ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और कानून की गंभीर अवहेलना माना। इस मामले में पुलिस जांच तेजी से पूरी की गई और अदालत ने तमाम सबूतों को सही पाते हुए दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। सऊदी अरब में इस तरह के मामलों में सजाएं बहुत कम समय के भीतर और बेहद कड़ाई से पूरी की जाती हैं ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश के प्रवासी समुदायों और मानवाधिकार संगठनों के बीच भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सऊदी अरब में लाखों की संख्या में बांग्लादेशी और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के नागरिक काम करते हैं। स्थानीय दूतावास और सरकारें अक्सर अपने नागरिकों को विदेश जाने से पहले वहां के स्थानीय कानूनों, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का पूरी तरह सम्मान करने की सलाह देती हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि छोटी सी लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना हरकत किसी व्यक्ति के लिए कितनी भारी पड़ सकती है। इस मामले में भी दूतावास के स्तर पर कानूनी मदद की गुंजाइश बहुत कम थी क्योंकि मामला सीधे तौर पर धार्मिक पवित्रता और देश के आंतरिक कानूनों से जुड़ा हुआ था।
प्रवासी मजदूरों के लिए खाड़ी देशों के सख्त कायदे-कानून
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में पिछले कुछ वर्षों में अपने कानूनों को आधुनिक बनाने के साथ-साथ अपराध और अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ सजा को और अधिक कठोर किया गया है। विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और साइबर अपराधों को लेकर वहां की पुलिस और अदालतें शून्य सहनशीलता की नीति पर काम करती हैं। इस घटना के बाद वहां रह रहे अन्य विदेशी कामगारों के बीच भी डर और सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बात की चर्चा है कि विदेश में काम करते समय वहां के नियमों की अनदेखी करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जानकारियों के मुताबिक, खाड़ी देशों के प्रशासन ने साफ कर दिया है कि देश की संस्कृति और पवित्र स्थलों का अपमान करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बांग्लादेशी कपल को दी गई इस फांसी की सजा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस छेड़ दी है कि प्रवासियों को दूसरे देशों में सांस्कृतिक संवेदनाओं का कितना ध्यान रखना चाहिए। इस पूरी घटना ने न केवल सऊदी अरब के कड़े कानूनों को उजागर किया है बल्कि दुनियाभर के प्रवासियों को यह संदेश भी दिया है कि कानून तोड़ने पर अंजाम बेहद भयानक हो सकता है।




