नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के बाद अब दम्माम एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों ने बड़ा ड्रोन हमला किया है। इस ताजा हमले से पूरे खाड़ी देश में खलबली मच गई है और नागरिक उड्डयन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।
इस हमले ने सऊदी अरब की सुरक्षा तैयारियों पर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। सऊदी अरब हर साल अपने रक्षा बजट पर पानी की तरह पैसा बहाता है। इसके बावजूद हूती विद्रोहियों के छोटे और सस्ते ड्रोन देश के सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण हवाई अड्डों को आसानी से भेद रहे हैं। इस नाकामी के बाद सऊदी सरकार के भीतर आंतरिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
83 अरब डॉलर के बजट के बाद भी क्यों लाचार दिखा सऊदी डिफेंस
सऊदी अरब का रक्षा बजट करीब 83 अरब डॉलर का है जो दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बजट में शामिल है। देश के पास अमेरिका और पश्चिमी देशों से खरीदे गए दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। इसके बावजूद हूतियों के ड्रोन हमलों को रोकने में यह तकनीक बार-बार नाकाम साबित हो रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक होने के बावजूद जमीनी रणनीतिक चूक इस नाकामी की मुख्य वजह है।
दम्माम एयरपोर्ट पर हुए इस हमले के तुरंत बाद कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा। कुछ विमानों के रूट बदलने पड़े जिससे मध्य पूर्व के रास्ते यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एयरलाइंस कंपनियों को सुरक्षा कारणों से अपनी उड़ानों का शेड्यूल नए सिरे से तय करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यदि हमलों का यह सिलसिला नहीं थमा तो हवाई किराया और बढ़ सकता है।
क्षेत्रीय तनाव और ईरान की भूमिका पर बढ़ी पश्चिम देशों की चिंता
इस बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव चरम पर है। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड फोर्ड की मौजूदगी के बाद ईरान ने भी कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के इन लगातार हमलों ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर कूटनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मियां तेज हो गई हैं ताकि इस बढ़ते संघर्ष को रोका जा सके। यूक्रेन और रूस के बीच ऊर्जा सीजफायर जैसे मुद्दों पर भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बयानबाजी चल रही हो, लेकिन पश्चिम एशिया का यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है। कच्चे तेल की आपूर्ति से लेकर विमानन ईंधन की कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइंस के सामने खड़े नए संकट
दम्माम और रियाद जैसे प्रमुख विमानन केंद्रों पर हमलों के कारण यात्रियों में भारी दहशत का माहौल है। कामकाजी लोग और पर्यटक अपनी यात्राओं को रद्द करने पर मजबूर हो रहे हैं। एयरलाइंस कर्मचारियों और ग्राउंड स्टाफ की सुरक्षा को लेकर भी एयरपोर्ट प्राधिकरणों ने नए और कड़े नियम लागू किए हैं। हर उड़ान से पहले विमानों और रनवे की सघन जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहतेभांपा जा सके।








