रियाद/ग्राउंड ब्यूरो — मध्य पूर्व के ताकतवर देश सऊदी अरब में इन दिनों कई बड़े बदलाव और घटनाएं एक साथ सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां देश की सेना और सुरक्षा एजेंसियां अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर रोजगार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले चौबीस घंटों में सऊदी अरब से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर सबका ध्यान खींचा है। इन खबरों में क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के नए नियम तक शामिल हैं।
सुरक्षा मामलों की बात करें तो सऊदी अरब के रक्षा तंत्र ने हाल ही में एक बड़ी सफलता हासिल की है। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा दागे गए कई ड्रोन्स को हवा में ही नाकाम करने और मार गिराने का दावा किया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पड़ोसी देशों में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ सऊदी अरब के रिश्तों और बयानों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। सऊदी प्रशासन ने उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि उसने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति पर कोई दबाव डाला था।
फिलिस्तीन के लिए राहत कार्य और मानवीय मदद
क्षेत्रीय कूटनीति और मानवता के मोर्चे पर सऊदी अरब लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। गाजा और फिलिस्तीन के संकट के बीच सऊदी अरब ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री और जरूरी सामान भेजा जा रहा है। सऊदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह संकट की इस घड़ी में फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़ी है। वहां के स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सऊदी अरब के इस मानवीय कदम की काफी सराहना की जा रही है। देश लगातार कोशिश कर रहा है कि युद्ध से प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ सऊदी अरब अपने देश के भीतर भी बड़े आर्थिक और प्रशासनिक फेरबदल कर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा काम देने के लिए सरकार ने अपनी पुरानी नीतियों का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस नीति के तहत देश के प्राइवेट सेक्टर यानी निजी कंपनियों में अब कड़े नियम लागू किए गए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कई खास तरह की नौकरियों पर सिर्फ सऊदी अरब के स्थानीय नागरिकों को ही रखा जाएगा।
निजी सेक्टर में नौकरियों पर स्थानीय नागरिकों का हक
सऊदी अरब ने अपने देश के युवाओं को रोजगार देने के लिए 'सौदाइजेशन' नीति को और ज्यादा कड़ा कर दिया है। ताजा फैसलों के मुताबिक, देश के निजी क्षेत्र की करीब उनहत्तर अलग-अलग नौकरियों में अब सौ फीसदी स्थानीय नागरिकों को ही रखना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी इन पदों पर किसी भी बाहरी देश के कामगार को नौकरी नहीं दी जाएगी। सरकार का यह कदम देश में बेरोजगारी कम करने और स्थानीय युवाओं के कौशल का पूरा इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला माना जा रहा है। इस नियम के लागू होने से विदेशी कामगारों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में इसको लेकर काफी खुशी देखी जा रही है।
दूसरी ओर, देश में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन पैसों के लेन-देन को लेकर भी कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और यूट्यूब पर 'एसटीसी पे' (STC Pay) अकाउंट फ्रीज होने की खबरों ने लोगों की नींद उड़ा दी थी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या उनका पैसा डूब जाएगा और इस तकनीकी समस्या को कैसे ठीक किया जा सकता है। हालांकि, संबंधित कंपनियों और डिजिटल वॉलेट्स ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और नियमों के पालन के तहत यह प्रक्रिया हो सकती है, और सही दस्तावेज जमा करके ग्राहक अपने खातों को दोबारा चालू करवा सकते हैं।
सुरक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पूरी नजर
कुल मिलाकर देखा जाए तो सऊदी अरब इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश एक तरफ अपनी सीमाओं की सुरक्षा और ड्रोन हमलों से निपटने में जुटा है, तो दूसरी तरफ गाजा के लोगों तक मदद पहुंचाकर अपनी कूटनीतिक छवि को भी मजबूत कर रहा है। इसके साथ ही, आंतरिक मोर्चे पर कड़े रोजगार नियम लाकर वह अपने नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के प्रयास में लगा हुआ है। द फ्रीलान्स की टीम इन सभी पहलुओं पर पैनी नजर बनाए हुए है और आगे भी इससे जुड़े हर नए अपडेट से अपने पाठकों को अवगत कराती रहेगी।








