रियाद एयरपोर्ट पर हुए इस अचानक और घातक हमले ने पूरे खाड़ी देश में हलचल मचा दी है। यमन की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों ने राजधानी को दहला दिया, जिसमें शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 12 लोगों की जान चली गई। इस हमले में तीन सौ से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। द फ्रीलान्स की टीम को स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक धमाका इतना तेज था कि इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी और एयरपोर्ट के एक हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है।
सऊदी अरब की राजधानी पर हुआ यह हमला सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। दुनिया की सबसे आधुनिक और महंगी हथियार प्रणालियों से लैस होने के बावजूद सऊदी सेना इस हमले को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई। सैन्य जानकारों का कहना है कि हूती विद्रोही अब कम लागत वाले ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें रडार की पकड़ में लाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि सऊदी अरब की पैट्रियट मिसाइल डिफेंस प्रणाली भी कई बार इन छोटे और खतरनाक हमलों को बीच रास्ते में रोकने में चूक जाती है।
यमन के पहाड़ी इलाकों में मजबूत हो रहे हूती विद्रोही
हूती विद्रोहियों ने हाल के महीनों में अपनी सामरिक स्थिति काफी मजबूत कर ली है। यमन के दुर्गम पहाड़ी इलाकों पर लगातार कब्जा जमाते हुए वे सऊदी अरब के नियंत्रण वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक इलाकों को ब्लॉक करने की तैयारी में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यमन की राजधानी सना को लेकर संघर्ष अब सीमा पार हमलों में बदल चुका है। हूती गुटों का साफ कहना है कि वे सना को पूरी तरह आजाद कराकर रहेंगे और इसके लिए वे खाड़ी देशों के भीतर लगातार बड़े और सटीक हमले करने से पीछे नहीं हटेंगे।
सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। लगातार हो रहे इन हमलों से निपटने के लिए अब नई रणनीतिक साझेदारियों पर जोर दिया जा रहा है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इस क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश सऊदी अरब की सुरक्षा में मदद के लिए आगे आ सकते हैं। हाल ही में कड़े सुरक्षा समझौतों और रक्षा पैक्ट को लेकर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है, ताकि खाड़ी क्षेत्र में हवाई हमलों के खतरे को किसी तरह कम किया जा सके और राजधानी रियाद की हिफाजत पुख्ता की जा सके।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगा ब्रेक और दहशत का माहौल
इस भीषण हमले के तुरंत बाद रियाद एयरपोर्ट पर सभी तरह की उड़ानों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। विमानन कंपनियों ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने विमानों के रूट बदल दिए हैं या उड़ानों को रद्द कर दिया है। एयरपोर्ट के बाहर और भीतर फंसे यात्रियों में भारी दहशत का माहौल देखा जा रहा है। सऊदी प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू कर दिए हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों में इस बात का डर लगातार बना हुआ है कि इस तरह के हमले आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं।
जमीनी हालात पर नजर डालें तो सऊदी सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उसे अपने नागरिकों और विदेशी कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो दूसरी तरफ यमन सीमा पर जारी जंग को निर्णायक मोड़ पर ले जाना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रक्षात्मक रुख अपनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हूती ठिकानों के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करनी होगी। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट के आने तक सऊदी प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक सैन्य प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की बड़ी चुनौतियां
मध्य पूर्व के इस मौजूदा संकट ने वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। रियाद जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में इस स्तर की सेंधमारी ने अन्य खाड़ी देशों को भी अपनी सुरक्षा समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले की निंदा करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीन पर शांति की कोई उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है।








