चेन्नई — दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित निर्देशक इन दिनों अपनी फिल्मों और बयानों को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने सिनेमैटिक सफर और काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर बात की। निर्देशक ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा से अपनी रचनात्मकता से समझौता किए बिना ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों के दिलों को छू सकें। उनके इस इंटरव्यू के सामने आने के बाद से ही फिल्म प्रेमियों के बीच उत्साह का माहौल है और सोशल मीडिया पर उनकी बातें तेजी से वायरल हो रही हैं।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए हर प्रोजेक्ट एक नया इम्तिहान होता है। उन्होंने बताया कि वे सुरक्षित रास्ते चुनने के बजाय हमेशा कुछ अलग और नया करने की कोशिश करते हैं। निर्देशक के अनुसार, जब तक किसी कहानी में कोई नयापन या चुनौती न हो, तब तक काम करने का असली मजा नहीं आता है। उनकी यह बेबाक शैली हमेशा से उनके प्रशंसकों और साथी कलाकारों को काफी पसंद आती रही है।
फिल्मों में नयापन और चुनौतियां
क ने बातचीत में आगे बताया कि रेट्रो शैली की फिल्मों पर काम करना उनके लिए कितना दिलचस्प रहा है। उन्होंने माना कि पुराने दौर की कहानियों को आज के समय के हिसाब से पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता है, लेकिन यही कठिनाई उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। उन्होंने अपनी पिछली और आगामी परियोजनाओं के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि तकनीक और कहानी कहने के ढंग में आए बदलावों को अपनाना हर निर्देशक के लिए जरूरी हो गया है।
उनके काम करने की शैली हमेशा से लीक से हटकर रही है, चाहे वह उनकी कोई एक्शन फिल्म हो या फिर ड्रामा। दर्शकों के बीच उनकी फिल्मों की एक अलग ही पहचान है, जो उन्हें मुख्यधारा के अन्य निर्देशकों से अलग खड़ा करती है। इस इंटरव्यू में उन्होंने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में वे कुछ और बड़े और अनूठे प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं, जिनका इंतजार उनके फैंस बेसब्री से कर रहे हैं।
सिनेमाई सफर और भविष्य की योजनाएं
निर्देशक ने अपने अब तक के सफर को याद करते हुए उन शुरुआती कठिनाइयों का भी जिक्र किया जिनका सामना उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखते वक्त करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि आज उन्हें इस बात की खुशी है कि वे दर्शकों को अपनी पसंद की कहानियां दिखाने में सफल रहे हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार के रूप में संतुष्टि तभी मिलती है जब उसकी कला लोगों तक पहुंचे और वे उससे जुड़ाव महसूस करें।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले समय में भी भारतीय सिनेमा को कई बेहतरीन और यादगार फिल्में देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके ये विचार और आगामी प्रोजेक्ट्स तमिल सिनेमा के साथ-साथ पूरे देश के दर्शकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनने वाले हैं।












