देश के सबसे चर्चित और दिग्गज सरकारी वकीलों में शुमार उज्ज्वल निकम इन दिनों अपनी बायोपिक और उससे जुड़े खुलासों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनकी जिंदगी पर आधारित फिल्म 'प्रहार' की घोषणा हुई है, जिसमें अभिनेता राजकुमार राव उनके किरदार में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म का मुख्य फोकस 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के बाद अजमल कसाब का कोर्ट ट्रायल और उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाना है। हालांकि, उज्ज्वल निकम का कानूनी करियर सिर्फ कसाब के केस तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने अपने तीन दशक लंबे करियर में कई ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों को संभाला है जिन्होंने देश की न्यायव्यवस्था और बॉलीवुड जगत को हिलाकर रख दिया था।
अजमल कसाब से लेकर संजय दत्त तक के ऐतिहासिक केस
उज्ज्वल निकम ने अपने वकालत के सफर में कई ऐसे ऐतिहासिक मुकदमों की पैरवी की है, जो आज भी कानूनी जगत में मिसाल माने जाते हैं। 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान जब पूरा देश सहमा हुआ था, तब उज्ज्वल निकम ने अदालत में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया था और अपनी मजबूत दलीलों के दम पर पाकिस्तान के खूंखार आतंकी अजमल कसाब को उसके अंजाम तक पहुंचाया था। लेकिन इसके अलावा, उनका नाता बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों और सनसनीखेज मामलों से भी रहा है।
साल 1993 के मुंबई सीरियल बॉम्ब ब्लास्ट मामले में जब बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता संजय दत्त का नाम सामने आया, तो हर कोई हैरान रह गया था। संजय दत्त पर अपने घर में अवैध हथियार रखने के गंभीर आरोप थे। महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस मामले में उज्ज्वल निकम ही मुख्य सरकारी वकील थे। जब अदालत ने संजय दत्त को इस मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, तो उस दौर में अभिनेता के फैंस के बीच भारी नाराजगी और मायूसी देखने को मिली थी।
संजय दत्त को लेकर उज्ज्वल निकम का वो वाकया
एक इंटरव्यू के दौरान उज्ज्वल निकम ने उस दौर का एक दिलचस्प और संवेदनशील किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया था कि जब अदालत संजय दत्त को सजा सुना रही थी, तब वह काफी डरे और घबराए हुए थे। अभिनेता बार-बार कह रहे थे कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और वह वापस लौटेंगे। उस मुश्किल घड़ी में एक वकील और मार्गदर्शक की तरह उज्ज्वल निकम ने उनसे कहा था, 'संजू, मीडिया तुम्हें देख रही है, कृपया सीधे खड़े रहो।'
निकम का मानना था कि यदि उस वक्त उन्होंने संजय दत्त को नहीं संभाला होता, तो मीडिया उन्हें पूरी तरह से विलेन के रूप में पेश कर देती क्योंकि उस समय जनता और मीडिया का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ था। हालांकि, देश के बेहतरीन वकीलों की फौज खड़े करने के बावजूद अदालत ने उन्हें नियमों के तहत दोषी पाया और सजा सुनाई।
गुलशन कुमार हत्याकांड और अंडरवर्ल्ड का साया
संजय दत्त के अलावा उज्ज्वल निकम ने साल 1997 में हुए टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के सनसनीखेज हत्याकांड में भी सरकारी वकील की भूमिका निभाई थी। उस दौर में मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का खौफ किस हद तक हावी था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिनदहाड़े संगीत जगत के एक बड़े दिग्गज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष ने संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण के नदीम सैफी पर हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया था।
उज्ज्वल निकम ने अपने बयानों में कई बार इस बात का जिक्र किया था कि कैसे इस साजिश के तार दुबई तक जुड़े थे और किस प्रकार पुलिस का शक नदीम की भूमिका पर गहराया था। हालांकि, अदालती प्रक्रिया और कानूनी दांव-पेंच के बीच इन मामलों ने भारतीय न्याय प्रणाली और मनोरंजन जगत के इतिहास में एक गहरा प्रभाव छोड़ा है। अब फिल्म 'प्रहार' के जरिए दर्शकों को परदे पर उज्ज्वल निकम की पेशेवर सूझबूझ और इन ऐतिहासिक मामलों के अनछुए पहलुओं को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
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