कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले मची खलबली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आहूत तिरंगा मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के आसपास के इलाकों में मार्च शुरू होने से ठीक पहले पुलिस प्रशासन ने कड़ी चौकसी बरती। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आयोजकों का दावा था कि यह एक शांतिपूर्ण नागरिक मार्च था जिसका उद्देश्य अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखना था, लेकिन आयोजन से पहले ही पुलिस ने बड़े स्तर पर पाबंदियां लागू कर दी थीं।
नई दिल्ली नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आयोजन स्थल के आसपास के क्षेत्र में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसके अलावा सेंट्रल पार्क को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। बावजूद इसके, कई छात्र संगठनों और समर्थकों के पहुंचने से माहौल गरमा गया।
अभिजीत दीपके के ठिकाने को लेकर CJP और पुलिस आमने-सामने
हिरासत में लिए जाने के बाद से ही कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनके संस्थापक अभिजीत दीपके को कहां रखा गया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और अन्य पदाधिकारियों ने पुलिस थानों के चक्कर काटे और स्पष्ट जानकारी मांगी। उनका आरोप था कि पुलिस ने न केवल उन्हें हिरासत में लिया बल्कि उनके वकीलों को भी मिलने नहीं दिया जा रहा है, जो कि मौलिक अधिकारों का हनन है।
पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने इस पूरी कार्रवाई को गैर-कानूनी करार देते हुए कहा कि तिरंगा फहराने और राष्ट्रध्वज के साथ मार्च निकालने की अपील करना किसी भी स्थिति में अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि एक लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को इस तरह से दबाना उचित नहीं है।
"दैनिक कामकाज और लोकतांत्रिक विरोध के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से नागरिकों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है। वकीलों को मिलने से रोकना कानून की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करता है।" — रत्ना सिंह, लीगल हेड, CJP
दिल्ली पुलिस का पक्ष: शांति भंग और नियमों के उल्लंघन का हवाला
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अपने बचाव में स्पष्ट किया है कि अभिजीत दीपके के खिलाफ यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रावधानों के तहत की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मार्च निकालने से पहले उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्देशों की अवहेलना की गई। पुलिस का यह भी कहना है कि पूर्व की घटनाओं के मद्देनजर उनसे एक निश्चित राशि का शांति बांड भरवाया गया था, जिसकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं के तहत उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस का तर्क है कि क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना सर्वोपरि है और किसी भी संभावित अशांति को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है।
छात्र संगठनों की सक्रियता और अन्य गिरफ्तारियों का घटनाक्रम
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केवल CJP के नेता ही नहीं, बल्कि अन्य वामपंथी और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी पुलिस के रडार पर रहे। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी मंडी हाउस और उसके आसपास के इलाकों से हिरासत में लिया गया था। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि उन्हें कई घंटों तक अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उचित चिकित्सा सुविधा समय पर नहीं दी गई। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों के जरिए विभिन्न दल और नए राजनीतिक संगठन अपनी जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रशासन किसी भी बड़े व्यवधान को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तकरार और बढ़ने की संभावना है।











