दुर्गा पूजा का नाम आते ही मन में नई पोशाकें, भव्य पंडाल और लजीज व्यंजनों की खुशबू तैरने लगती है। हालांकि, अष्टमी के दोपहर के भोजन में जब गरमा-गरम भोग की खिचड़ी परोसी जाती है, तो खाने का मजा दोगुना हो जाता है। इसके साथ लाबड़ा, बैगुनी, चटनी और पायस का मेल इस भोजन को और भी खास बना देता है। पंडालों में मिलने वाली उस पारंपरिक और स्वादिष्ट खिचड़ी का स्वाद अब आप अपने घर पर भी बहुत आसानी से ला सकती हैं। इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, बस चावल और दाल का सही अनुपात, मसालों का संतुलित प्रयोग और कुछ खास खाना पकाने की तकनीकें पता होनी चाहिए।
अष्टमी के भोग की खिचड़ी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
३-४ लोगों के लिए खिचड़ी तैयार करने के लिए आपको चाहिए: १ कप गोबিন্দভোগ चावल, १ कप सোনামুগ दाल, २ मीडियम साइज के आलू, फूलगोभी के ६-८ छोटे टुकड़े, १ छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट, १ छोटा चम्मच जीरा, २ तेजपत्ता, २ सूखी लाल मिर्च, थोड़ा सा खड़ा गरम मसाला, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, १ छोटा चम्मच जीरा पाउडर, १-२ टेबलस्पून घी, और स्वादानुसार नमक व चीनी।
बनाने की आसान विधि और स्टेप्स
पहला चरण: सबसे पहले एक कढ़ाई को गर्म करें और उसमें सোনামুগ दाल को बिना तेल या घी के सूखा भून लें। जब दाल से हल्की खुशबू आने लगे और रंग हल्का सुनहरा हो जाए, तो आंच बंद कर दें। ध्यान रहे कि दाल जले नहीं। इसके बाद दाल को धोकर पानी निथार लें। यह कदम खिचड़ी में मंदिर जैसी खास खुशबू लाता है।
दूसरा चरण: गोबিন্দভোগ चावल को अच्छी तरह धोकर उसका पानी निकाल लें। इस चावल की अपनी एक अलग महक होती है जो खिचड़ी के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। यदि गोबিন্দভোগ उपलब्ध न हो, तो आप किसी अन्य खुशबूदार छोटे दाने वाले चावल का उपयोग कर सकती हैं।
तीसरा चरण: एक बड़ी कढ़ाई में घी गर्म करें। उसमें तेजपत्ता, सूखी लाल मिर्च, खड़ा गरम मसाला और जीरा का तड़का लगाएं। इसके बाद आलू और फूलगोभी के टुकड़े डालकर हल्का भून लें। अब अदरक का पेस्ट, हल्दी और जीरा पाउडर डालकर थोड़ा सा पानी छिड़कते हुए मसालों को अच्छी तरह भून लें।
चौथा चरण: अब कढ़ाई में तैयार चावल और दाल डालकर कुछ मिनट तक भूनें। इसके बाद आवश्यकतानुसार गर्म पानी, नमक और थोड़ी सी चीनी मिला लें। मध्यम आंच पर पकने दें। जब चावल और दाल अच्छी तरह नरम हो जाएं, तो आंच धीमी कर दें। यदि खिचड़ी अधिक गाढ़ी हो जाए, तो थोड़ा गर्म पानी मिलाया जा सकता है, लेकिन इसे बहुत ज्यादा पतला न करें।
पाँचवाँ चरण: जब चावल और दाल पूरी तरह से पककर मिल जाएं, तो ऊपर से थोड़ा सा शुद्ध घी और छिड़क दें। कढ़ाई को ढंककर २-३ मिनट के लिए छोड़ दें। आपकी गरमा-गरम और सुंगधित अष्टमी के भोग वाली खिचड़ी तैयार है।
स्वाद बढ़ाने के खास टिप्स
भोग जैसा असली स्वाद पाने के लिए हमेशा गुणवत्ता वाले चावल, भुनी हुई मूंग दाल और शुद्ध घी का ही प्रयोग करें। मसालों का उपयोग सीमित मात्रा में करें ताकि चावल और दाल की प्राकृतिक खुशबू दबे नहीं। खाना बनाते समय हमेशा गुनगुने या गर्म पानी का ही इस्तेमाल करें, इससे पकने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसे लाबड़ा, बैगुनी या आलू दम के साथ गरमा-गरम परोसें।
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