मेनोपॉज के बाद क्यों बदलने लगता है महिलाओं का शरीर?
50 की उम्र तक आते-आते महिलाओं को अक्सर यह महसूस होने लगता है कि उनका शरीर पहले की तरह उनका साथ नहीं दे रहा है। सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकान होना, वजन बढ़ना, शरीर की ताकत कम होना और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके पीछे एक बड़ा शारीरिक कारण होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
दरअसल, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से घटने लगता है। इस हार्मोन की कमी के कारण मांसपेशियां और हड्डियां अंदर से कमजोर होने लगती हैं। साथ ही वजन बढ़ना, नींद न आना और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियों का जोखिम भी काफी हद तक बढ़ जाता है, जो दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।
साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि इस उम्र के बाद केवल प्रोटीन का सेवन करना पर्याप्त नहीं होता है। मांसपेशियों को लंबे समय तक मजबूत और सक्रिय बनाए रखने के लिए वेट ट्रेनिंग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
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वेट ट्रेनिंग क्या है और यह महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है?
वेट ट्रेनिंग एक प्रकार की एक्सरसाइज है, जिसमें मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए वजन या किसी निश्चित रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें डंबल, बारबेल, केटलबेल या फिर रेजिस्टेंस बैंड जैसे आसान उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए इसकी जरूरत कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।
जब मसल्स पर वजन का हल्का दबाव पड़ता है, तो शरीर उन्हें मजबूत बनाने के लिए नए मसल टिश्यू तैयार करता है। इससे उम्र के साथ तेजी से होने वाले मसल्स लॉस का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा, यह एक्सरसाइज पेट के आसपास जमने वाले जिद्दी बॉडी फैट को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है।
साइंस डायरेक्ट में पब्लिश एक अन्य स्टडी के अनुसार, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉट फ्लैशेज की गंभीरता और उसकी फ्रीक्वेंसी में कमी आती है। साथ ही रात की नींद और मानसिक मूड में भी सुधार देखा गया है।
"मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में हफ्ते में 2 से 3 बार वेट ट्रेनिंग करने से न सिर्फ शारीरिक ताकत वापस आती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।"— डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर
मेंटल हेल्थ और बीमारियों के खतरे को कम करने में असरदार
वेट ट्रेनिंग का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक सेहत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। साल 2018 में ‘जामा साइकिएट्री’ में प्रकाशित 33 клиниcal ट्रायल्स के एक मेटा-एनालिसिस में यह पाया गया कि नियमित रूप से वेट ट्रेनिंग करने से डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में बड़ी मदद मिलती है।
इसके अलावा, नियमित रूप से वजन उठाने या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करने से टाइप-2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखती है, जो इस उम्र की महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की बात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी फिटनेस रूटीन में बदलाव करना चाहिए। कार्डियो के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी उतनी ही अहमियत देनी चाहिए ताकि बुढ़ापे में भी हड्डियां मजबूत बनी रहें और जोड़ों का दर्द परेशान न करे।
घर पर कैसे करें वेट ट्रेनिंग की शुरुआत?
कई महिलाओं को लगता है कि वेट ट्रेनिंग के लिए जिम जाना अनिवार्य है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। घर पर भी अपनी क्षमता के अनुसार आसानी से इसकी शुरुआत की जा सकती है। इसके लिए पानी की भरी हुई बोतलें, रेजिस्टेंस बैंड, हल्के डंबल या फिर शरीर के अपने वजन (बॉडी-वेट एक्सरसाइज) का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जयपुर के कोकून हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मितुल गुप्ता के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए हफ्ते में 2 से 3 बार वेट ट्रेनिंग करना बिल्कुल पर्याप्त है। हर सेशन को 30 से 60 मिनट के बीच रखा जा सकता है। शुरुआत हमेशा बहुत हल्के वजन के साथ करनी चाहिए ताकि मांसपेशियों पर अचानक ज्यादा दबाव न पड़े।
अगर किसी महिला को जोड़ों की गंभीर समस्या या कोई अन्य पुरानी बीमारी है, तो उन्हें एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी सर्टिफाइड फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही तकनीक और सावधानी के साथ की गई एक्सरसाइज सुरक्षित और बेहद फायदेमंद होती है।
डाइट में बदलाव और किन बातों का रखें खास ख्याल
मांसपेशियों की रिकवरी और मजबूती के लिए केवल एक्सरसाइज काफी नहीं है, बल्कि इसके साथ सही पोषण यानी संतुलित आहार की भी उतनी ही जरूरत होती है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी डाइट में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए ताकि हड्डियों का घनत्व (बोन्स डेंसिटी) बना रहे।
वेट ट्रेनिंग के दौरान हल्की थकान या मांसपेशियों में सामान्य खिंचाव होना स्वाभाविक है, लेकिन यदि छाती में दर्द, चक्कर आना या अत्यधिक सांस फूलने जैसी गंभीर समस्याएं आएं, तो तुरंत एक्सरसाइज रोककर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अंत में यह समझना जरूरी है कि 50 या 60 साल की उम्र में भी पहली बार वेट ट्रेनिंग शुरू की जा सकती है। हमारे शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां किसी भी उम्र में एक्सरसाइज के प्रति सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया देती हैं, बशर्ते शुरुआत सही और सुनियोजित तरीके से की जाए।





