हाल ही में राजनीति के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक एक वीडियो ने खासी हलचल मचाई, जिसमें एक बड़े नेता को गुलाबी रंग का एनर्जी ड्रिंक पीते हुए देखा गया। इस एक दृश्य ने रातों-रात युवाओं और फिटनेस के प्रति सजग लोगों के बीच इन विज्ञापनों से सजे पेय पदार्थों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी। क्या वाकई यह चमक-दमक से भरपूर ड्रिंक आपको ऊर्जा देता है या फिर यह बीमारियों का एक ऐसा कॉकटेल है जो धीरे-धीरे आपके शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है? 'द फ्रीलांस' की ग्राउंड रिपोर्ट में हमने जब इस सच की तह तक पड़ताल की, तो जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे।
एनर्जी ड्रिंक्स का छलावा और शरीर पर इसके घातक प्रहार
देखने में यह ड्रिंक भले ही कुछ पलों के लिए चुस्ती और मानसिक सतर्कता (Alertness) का अहसास कराता हो, लेकिन इसके पीछे छिपा रसायन विज्ञान बेहद खतरनाक है। 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ' (2019) के एक व्यवस्थित अध्ययन के मुताबिक, इन ड्रिंक्स में मौजूद अत्यधिक चीनी सीधे तौर पर फैटी लिवर के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। वहीं, 'जर्नल ऑफ बायोसाइंस एंड मेडिसिन' का आंकड़ा बताता है कि प्रति सर्विंग 20 से 30 ग्राम तक शुगर शरीर में डाली जाती है। विशेषज्ञों का यहां तक मानना है कि कई मामलों में ये ड्रिंक्स सोडा और शराब से भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञ की राय और मेटाबॉलिक प्रक्रिया
नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के एंडोक्रोनोलॉजी, डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक मेडिसिन के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अभिनव कुमार गुप्ता का कहना है कि इन ड्रिंक्स में मुख्य रूप से कैफीन, शुगर, टॉरिन और विटामिन-बी (विशेषकर नियासिन) होते हैं, जबकि शरीर की बुनियादी जरूरत यानी प्रोटीन और फाइबर का नामोनिशान नहीं होता। इसे कभी भी संतुलित पोषण नहीं कहा जा सकता। खाली पेट इनका सेवन करने पर शरीर में कैफीन और शुगर का अवशोषण इतनी तेजी से होता है कि लिवर पर अचानक भारी दबाव आ जाता है। अत्यधिक नियासिन की मात्रा लिवर पर टॉक्सिक असर डालती है, जिससे एक्यूट हेपेटाइटिस और गंभीर अंगों की क्षति का खतरा पैदा हो जाता है। विशेषज्ञों की साफ दो टूक है कि एनर्जी ड्रिंक की एक बूंद भी सुरक्षित नहीं है, इसलिए इनसे पूरी तरह तौबा करना ही बुद्धिमानी है।









