उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी सुगबुगाहट के बीच पाला बदलने का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है जब उसके तीन कद्दावर विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में एक बार फिर गर्माहट ला दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो सकती है।
पार्टी बदलने वाले इन नेताओं में अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। इन तीनों नेताओं के एक साथ पाला बदलने से समाजवादी पार्टी के भीतरखाने चल रही नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। स्थानीय स्तर पर भी इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
अमेठी में हुआ सियासी मिलन समारोह
भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का यह कार्यक्रम विशेष तौर पर अमेठी क्षेत्र में आयोजित किया गया। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे। बीजेपी में शामिल होने वाले इन विधायकों ने खुलकर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए और अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि पार्टी के भीतर लगातार घुटन महसूस हो रही थी और वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।
विधायकों ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा कई मुद्दों पर लिए गए फैसलों से जनप्रतिनिधि असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। इस मौके पर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिससे आगामी चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव का बागी नेताओं पर करारा तंज
अपने विधायकों के पार्टी छोड़ने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बिना नाम लिए बागी नेताओं पर करारा हमला बोला और कहा कि दल बदलने से जनता का मिजाज नहीं बदलता। उन्होंने इसे अवसरवादी राजनीति करार देते हुए कहा कि जो लोग जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें जनता समय आने पर सबक सिखाती है।
"अपने कबीले से जो दगा करता है बंदा, दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं उसका कंधा। जिस पार्टी के टिकट पर जनता ने जिताया, जब वे उसी के नहीं हुए तो अन्यत्र क्या स्थिति होगी।" — अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
सपा प्रमुख के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पार्टी के अन्य नेताओं का भी कहना है कि इन नेताओं के जाने से संगठन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि इन्हें पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अलग कर दिया गया था। पार्टी का दावा है कि कार्यकर्ता पूरी तरह एकजुट हैं और आगामी चुनावों में जनता इसका करारा जवाब देगी।
राज्यसभा चुनाव की कसैली यादें और क्रॉस वोटिंग
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन तीनों विधायकों के पाला बदलने की नींव बहुत पहले ही रख दी गई थी। पिछले दिनों हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान इन विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की थी और बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था। उसी समय से इनका समाजवादी पार्टी से मोहभंग होना तय माना जा रहा था और पार्टी स्तर पर भी इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
इस घटनाक्रम के बाद से ही ये विधायक लगातार पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे और क्षेत्र में उनके बग्गी तेवर देखने को मिल रहे थे। अब औपचारिक रूप से बीजेपी का दामन थामने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनावों में इन नेताओं के लिए अपनी पुरानी सीटों पर पकड़ बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है क्योंकि मतदाता अब पूरी तरह जागरूक हो चुके हैं।
आगामी चुनावों पर पड़ेगा कितना असर?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल-बदल का यह खेल कोई नया नहीं है, लेकिन हर चुनाव से पहले इस तरह के समीकरण राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बीजेपी का मानना है कि इन नेताओं के आने से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और विपक्षी दल का किला दरकेगा। वहीं, समाजवादी पार्टी का दावा है कि जनता दलबदलू नेताओं को पूरी तरह से नकार चुकी है और चुनाव में इसका माकूल जवाब देगी।
अब देखना यह होगा कि जनता इन राजनीतिक उठापटक को किस रूप में लेती है और आने वाले दिनों में कौन-कौन से नए चेहरे पाला बदलते हैं। राज्य में चुनावी सरगर्मी जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाला समय राजनीतिक दलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होने वाला है।











