कैंसर और संक्रमण का खतरनाक कनेक्शन
आमतौर पर जब भी कैंसर जैसी घातक बीमारी का जिक्र होता है, तो हमारे जहन में सबसे पहले धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारण आते हैं। हालांकि, हाल ही में चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित जर्नल 'द लैंसेट ऑन्कोलॉजी' में पब्लिश हुई एक नई वैश्विक स्टडी ने इस बीमारी को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। इस शोध के मुताबिक, हमारे शरीर में पनपने वाले कुछ खास तरह के इंफेक्शन भी कैंसर के पनपने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो यह बात बेहद डरावनी लगती है कि हर आठ में से एक कैंसर रोगी के पीछे किसी न किसी संक्रमण का हाथ होता है।
यह शोध इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। वैज्ञानिकों ने साल 2024 के ग्लोबल कैंसर डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि कौन-से बैक्टीरिया या वायरस सीधे तौर पर कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि किसी भी इंफेक्शन का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर हो ही जाएगा, लेकिन लंबे समय तक शरीर में बने रहने वाले ये संक्रमण खतरे को कई गुना जरूर बढ़ा देते हैं।
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एच. पाइलोरी बैक्टीरिया कैसे बनता है पेट के कैंसर की वजह
वैज्ञानिकों द्वारा चिन्हित किए गए पांच प्रमुख संक्रमणों में एच. पाइलोरी (H. pylori) बैक्टीरिया सबसे ऊपर है। साल 2024 के दौरान दुनियाभर में सामने आए कैंसर के लाखों मामलों में इस बैक्टीरिया की मुख्य भूमिका पाई गई। अकेले इस एक संक्रमण से करीब 7.6 लाख मामले जुड़े हुए थे। एच. पाइलोरी एक ऐसा सूक्ष्म जीव है जो इंसानी पेट की अंदरूनी परत को संक्रमित करता है। हैरानी की बात यह है कि शुरुआती दौर में इस संक्रमण के कोई भी साफ या बड़े लक्षण नजर नहीं आते हैं, जिसकी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
यदि यह बैक्टीरिया लंबे समय तक पेट के अंदर बना रहे, तो यह गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। इसकी वजह से पेट में लगातार अल्सर की शिकायत रहने लगती है और समय के साथ यह स्थिति गैस्ट्रिक अल्सर से होते हुए पेट के खतरनाक कैंसर में बदल सकती है। डॉक्टरों का सुझाव है कि पेट से जुड़ी लगातार रहने वाली समस्याओं को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय पर अपनी मेडिकल जांच करवानी चाहिए ताकि इस बैक्टीरिया को समय रहते खत्म किया जा सके।
एचपीवी वायरस और सर्वाइकल कैंसर का गहरा नाता
इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी (HPV) का नाम आता है। साल 2024 में लगभग 7.5 लाख कैंसर के नए मामले सीधे तौर पर इसी वायरस से जुड़े दर्ज किए गए। एचपीवी का नाम आते ही सबसे पहले महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल यानी बच्चेदानी के मुंह के कैंसर की बात सामने आती है। यह वायरस सर्वाइकल कैंसर के सबसे प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। इसके अलावा, यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी कुछ खास प्रकार के कैंसर का खतरा पैदा कर सकता है।
अच्छी बात यह है कि चिकित्सा विज्ञान ने इस वायरस से निपटने के लिए पहले ही टीका यानी वैक्सीन विकसित कर ली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का जोर लगातार इस बात पर रहता है कि समय रहते एचपीवी वैक्सीनेशन करवा लिया जाए ताकि इस गंभीर वायरस के संक्रमण से बचा जा सके। टीकाकरण को कैंसर की रोकथाम के लिए सबसे मजबूत और कारगर हथियारों में गिना जाता है, जिससे आने वाले समय में इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हेपेटाइटिस बी और सी लिवर के लिए कैसे हैं घातक
लिवर कैंसर के मामलों के पीछे मुख्य रूप से हेपेटाइटिस बी (HBV) और हेपेटाइटिस सी (HCV) वायरस जिम्मेदार पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में सामने आए सभी नए कैंसर मामलों में से करीब 2 प्रतिशत का सीधा संबंध हेपेटाइटिस बी वायरस से था। यह वायरस सीधे तौर पर मानव लिवर को प्रभावित करता है। जब किसी व्यक्ति के शरीर में हेपेटाइटिस बी का संक्रमण लंबे वक्त तक बना रहता है, तो लिवर की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं और वहां सिरोसिस या कैंसर की गांठें बनने का जोखिम पैदा हो जाता है।
वहीं दूसरी ओर, हेपेटाइटिस सी वायरस से जुड़े मामलों का प्रतिशत भले ही एक फीसदी से कम रहा हो, लेकिन इसकी गंभीरता को कम करके नहीं आंका जा सकता है। ये दोनों ही बीमारियां खून और शारीरिक तरल पदार्थों के जरिए फैल सकती हैं। लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है जो खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है, लेकिन इन वायरसों का क्रॉनिक इंफेक्शन उस क्षमता को पूरी तरह खत्म कर देता है, जिससे अंततः लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
एपस्टीन-बार वायरस और बचाव के लिए जरूरी कदम
इन सबके अलावा, पांचवें प्रमुख संक्रमण के रूप में एपस्टीन-बार वायरस (EBV) की पहचान की गई है, जो विभिन्न प्रकार के लिंफूमा और अन्य कैंसर से जुड़ा हुआ पाया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी संक्रमणों से बचने के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित खानपान, समय पर टीकाकरण और नियमित मेडिकल हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी हैं। चूंकि कई बार इन संक्रमणों के शुरुआती लक्षण शरीर में बिल्कुल महसूस नहीं होते, इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से स्क्रीनिंग करवाना ही इस अदृश्य खतरे से बचने का सबसे अचूक उपाय है।
"कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे केवल जीवनशैली ही नहीं, बल्कि कई प्रकार के सूक्ष्म संक्रमण भी लंबे समय तक शरीर में रहकर बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। समय रहते इनकी पहचान और टीकाकरण से बचाव संभव है।" — मेडिकल रिसर्च एक्सपर्ट्स, IARC








