गुजरात के केवडिया में सजा सिनेमा का सबसे बड़ा दरबार
देश के सबसे प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) का समारोह इस बार ऐतिहासिक रूप से गुजरात के केवडिया में आयोजित किया गया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास बने भव्य और हाईटेक जर्मन एल्युमिनियम स्ट्रक्चरल डोम में आयोजित इस समारोह की शुरुआत समवेत स्वर में वंदे मातरम के गान के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगान भी गाया गया, जिसने इस राष्ट्रीय उत्सव के माहौल को और अधिक गरिमामयी बना दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने करकमलों से देश के विभिन्न फिल्म उद्योगों के चुनिंदा कलाकारों और निर्देशकों को इस साल के राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।
यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को देश के किसी प्रमुख पर्यटन स्थल पर आयोजित किया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल के पीछे की मंशा को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से सिनेमा और पर्यटन को एक साथ जोड़ने की अनूठी पहल की गई है। इस बदलाव का उद्देश्य देश की कला, संस्कृति और पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाना है। समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों और विजेताओं के लिए विशेष रूप से पारंपरिक गुजराती व्यंजनों जैसे ढोकला, पात्रा, उंधियू और कढ़ी-खिचड़ी का प्रबंध किया गया था, जिसने इस आयोजन में चार चांद लगा दिए।
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कार्तिक आर्यन और ममूटी बने बेस्ट एक्टर, यामी गौतम को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के परिणाम सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद उत्साहजनक रहे। अभिनेता कार्तिक आर्यन को उनकी प्रेरणादायक और कठिन मेहनत वाली फिल्म 'चंदू चैंपियन' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (बेस्ट एक्टर) का नेशनल अवॉर्ड मिला है। कार्तिक के करियर का यह पहला राष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसे पाने के बाद उनकी खुशी साफ झलक रही थी। उनके साथ ही मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को फिल्म 'ब्रह्मयुगम' के शानदार अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
वहीं, महिलाओं की श्रेणी में अभिनेत्री यामी गौतम ने बाजी मारी। उन्हें अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थ्रिलर फिल्म 'आर्टिकल 370' में बेहतरीन अभिनय के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यामी अपने पति और फिल्म के निर्माता आदित्य धर के साथ समारोह में पहुंची थीं। इसके अलावा, फिल्म 'भक्षक' में अपने संजीदा अभिनय के लिए जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
अनंत नाग को मिला दादा साहब फाल्के पुरस्कार, कन्नड़ सिनेमा का बढ़ा मान
भारतीय सिनेमा में अपने छह दशक लंबे करियर और अमूल्य योगदान के लिए इस साल के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को सम्मानित किया गया। समारोह में जैसे ही उनका नाम लिया गया, वहां मौजूद सभी मेहमानों और कलाकारों ने खड़े होकर उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया। 4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग (अनंत नागरकट्टे) कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने अपने अभिनय करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं।
कन्नड़ के अलावा उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। हाल ही में उन्हें ब्लॉकबस्टर फिल्म 'KGF' के दोनों भागों में भी अहम भूमिका निभाते हुए देखा गया था। उनकी यह उपलब्धि भारतीय सिनेमा के हर एक कोने के लिए गर्व का क्षण रही। पिछले साल साउथ के सुपरस्टार मोहनलाल को इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया था, और इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अनंत नाग को यह सम्मान मिला है।
ओटीटी फिल्मों का दबदबा और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं की धूम
कोरोना महामारी के बाद भारतीय सिनेमा के रिलीज पैटर्न में आए बड़े बदलाव का असर अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। संजय मिश्रा की फिल्म 'भक्षक' सीधे नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी, जिसे राष्ट्रीय सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बनने वाली बेहतरीन सामग्री को भी अब बराबरी का सम्मान मिल रहा है। पिछले पांच संस्करणों में लगभग नौ ऐसी फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं जो सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थीं।
समारोह के दौरान अन्य प्रमुख विजेताओं में रणदीप हुड्डा को फिल्म 'स्वतंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डायरेक्शन का पुरस्कार मिला। वहीं, फिल्म 'आर्टिकल 370' को बेस्ट फीचर फिल्म और 'श्रीकांत' को बेस्ट हिंदी फिल्म के रूप में चुना गया। डॉक्यूमेंट्री और नॉन-फीचर श्रेणी में फिल्म 'मैं निदा' को सर्वश्रेष्ठ कला/सांस्कृतिक फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि आनंद एल. राय को 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक' के लिए बेस्ट डायरेक्शन का अवॉर्ड मिला।
"हर फिल्म के पीछे पूरी टीम की कड़ी मेहनत होती है और हर सम्मान के पीछे पर्दे के पीछे काम करने वाले तकनीकी और ग्राउंड वर्कर्स का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। हमें मिलकर इन सभी कलाकारों की कला का सम्मान करना चाहिए।" — अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
7 पुरस्कारों से शुरू हुआ सफर, आज 45 श्रेणियों तक पहुंचा
वर्ष 1954 में जब पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत हुई थी, तब विजेताओं को देने के लिए कुल मिलाकर सिर्फ 7 पुरस्कार तय किए गए थे। समय के साथ भारतीय सिनेमा के विस्तार और विभिन्न विधाओं के विकास को देखते हुए इन पुरस्कारों के दायरे को बढ़ाया गया। आज 72 साल बाद यह सफर मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां 72वें संस्करण में कुल 45 अलग-अलग पुरस्कार बांटे जा रहे हैं।
इन 45 पुरस्कारों में 26 फीचर फिल्में, 16 नॉन-फीचर फिल्में, सिनेमा पर लिखे गए बेहतरीन दो साहित्य और एक सर्वोच्च दादा साहब फाल्के पुरस्कार शामिल है। यह इस बात का सबूत है कि भारतीय सिनेमा अब केवल मुख्यधारा की मनोरंजन कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डॉक्यूमेंट्री, लघु फिल्मों, सिनेमाई इतिहास लेखन और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की कला को भी वैश्विक मंच पर गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है।





