8वें वेतन आयोग की सुगबुगाहट के बीच पेंशनर्स की बढ़ी धड़कनें
देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करोड़ों पेंशनभोगियों को भी इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि आने वाले समय में उनकी आर्थिक स्थिति में क्या बदलाव होंगे। हालांकि, इस बीच पुराने और पूर्व पेंशनभोगियों के मन में एक बड़ा सवाल और गहरी चिंता घर कर गई है कि क्या उनकी पेंशन में भी इजाफा होगा या नहीं। इसी को लेकर अब देश के वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर कर्मचारियों ने सरकार के सामने अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है और सीधी गुहार लगाई है।
हाल ही में, रिटायर्ड एम्पॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) नामक संगठन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से संगठन ने उन सभी लाखों पेंशनभोगियों की चिंताओं को सरकार के समक्ष रखा है, जो 1 जनवरी 2026 से पहले अपनी सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पेंशनर्स का कहना है कि नए वेतन आयोग के नियमों को लेकर उनके मन में भ्रम की स्थिति है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है ताकि बुजुर्गों को वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति मिल सके।
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'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' में संशोधन की उठी मांग
REWA के जनरल सेक्रेटरी साधु सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मुख्य रूप से 8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) को लेकर आपत्ति और चिंता जताई गई है। संगठन का मुख्य तर्क नवंबर 2025 में जारी किए गए ToR के बिंदु संख्या 2(e) पर आधारित है। इस बिंदु के मुताबिक, आयोग मुख्य रूप सेवारत कर्मचारियों के लिए NPS/UPS और इसके दायरे से बाहर की पेंशन तथा डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी के स्ट्रक्चर की समीक्षा करेगा।
संगठन का यह कहना है कि इस ड्राफ्ट में वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों की पेंशन और फायदों का तो जिक्र साफ तौर पर है, लेकिन उन पूर्व कर्मचारियों के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं लिखी गई है जो पहले ही रिटायर हो चुके हैं। पेंशनर्स संघ का तर्क है कि यदि नियमों में पूर्व पेंशनभोगियों और उनकी पारिवारिक पेंशन (Family Pension) के संशोधन के प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया, तो इससे लाखों बुजुर्गों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और उनके साथ अन्याय की स्थिति बन सकती है।
"सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 8वें वेतन आयोग के नियमों में पुराने पेंशनभोगियों की अनदेखी न हो। ToR में स्पष्ट संशोधन किया जाए ताकि देश के 6.9 मिलियन पेंशनर्स और उनके परिवारों के मन से यह अनिश्चितता और असमंजस हमेशा के लिए दूर हो सके।" — साधु सिंह, जनरल सेक्रेटरी, REWA
पुराने वेतन आयोगों के नियमों से हो रही है तुलना
पेंशनभोगियों के संगठन ने अपनी इस मांग के समर्थन में पिछले यानी 7वें और अन्य पुराने वेतन आयोगों का भी उदाहरण दिया है। REWA के अनुसार, जब पिछला यानी 7वां वेतन आयोग गठित किया गया था, तब उसके 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' में पेंशन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन (Revision) को लेकर पूरी तरह से स्पष्टता बरती गई थी। हर पुराने आयोग में इस बात का साफ उल्लेख होता था कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पेंशन कैसे और किस आधार पर बढ़ाई जाएगी।
इस बार शुरुआती दिशा-निर्देशों में इस तरह की स्पष्टता का अभाव होने के कारण ही पेंशनभोगियों के बीच तमाम तरह की अटकलें और चिंताएं फैल रही हैं। बुजुर्ग कर्मचारियों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर वित्तीय स्थिरता और चिकित्सा संबंधी खर्चों के लिए वे पूरी तरह से अपनी पेंशन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि नियमों में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता रहती है, तो उनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
सरकार से स्पष्टीकरण या प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की अपील
REWA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह भी आग्रह किया है कि जब तक इस मामले में कोई औपचारिक संशोधन या नया दिशा-निर्देश जारी नहीं किया जाता, तब तक सरकार या वित्त मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रेस रिलीज जारी की जानी चाहिए। उनका मानना है कि इस प्रकार का एक आधिकारिक बयान देश भर के लाखों वरिष्ठ नागरिकों के बीच फैली हुई भ्रम की स्थिति को तुरंत समाप्त कर सकता है।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय इस संवेदनशील मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। बुजुर्ग पेंशनर्स देश की रीढ़ रहे हैं और अपनी सेवा के लंबे साल देश को देने के बाद वे सम्मानजनक जीवन जीने के हकदार हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पत्र और पेंशनभोगियों की इस जायज मांग पर क्या कुछ आधिकारिक कदम उठाती है और आगामी दिनों में क्या नए निर्देश सामने आते हैं।







