संगीत की दुनिया का चमकता सितारा और अनकहा संघर्ष
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में जब सिंगिंग रियलिटी शो की शुरुआत हुई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह मंच देश के कोने-कोने से छुपे हुए हुनर को इस कदर सामने ले आएगा। इस क्रांति के पहले प्रतीक बने कलाकार ने हाल ही में अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों पर ऐसी बातें साझा की हैं, जिन्हें सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं। आज भले ही वह संगीत प्रेमियों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हैं और अपने सुरों का जादू बिखेर रहे हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका रास्ता कांटों भरा था।
एक आम परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस कलाकार के पास बचपन में वह सब सुविधाएं नहीं थीं जो आज के दौर के युवाओं को आसानी से मिल जाती हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने और घर की माली हालत सुधारने के लिए उन्हें बेहद कम उम्र में ही मंचों पर गाना शुरू करना पड़ा था। पंडालों और छोटे-मोटे कार्यक्रमों में गाना गाकर मिलने वाले सौ-दो सौ रुपये भी उनके लिए बहुत बड़ी राहत हुआ करते थे। परिवार से आर्थिक सहयोग सीमित होने के कारण उन्हें हर कदम पर खुद ही संघर्ष करना पड़ा था।
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जब जेब में बचे थे सिर्फ ग्यारह रुपये और रास्ते में खराब हो गई बस
अपने शुरुआती दिनों का एक ऐसा मार्मिक किस्सा उन्होंने साझा किया है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। महज पंद्रह साल की उम्र में जब वे अपनी संगीत की जरूरतों और यात्रा के लिए घर से निकले थे, तब उनके पास पैसों की भारी कमी थी। उस वक्त उनके पास कुल मिलाकर ग्यारह रुपये थे। इसमें से दस रुपये की बस की टिकट थी और एक रुपया अतिरिक्त था।
सफर के दौरान अचानक बीच रास्ते में उनकी बस खराब हो गई। अब उनके पास न तो दूसरी बस पकड़ने के लिए पैसे बचे थे और न ही वे घर लौट सकते थे। उस एक रुपये से उन्होंने किसी तरह अपने एक परिचित को फोन करने की कोशिश की, लेकिन वह एक रुपया भी खर्च हो गया। बीच रास्ते में खुद को पूरी तरह लाचार पाकर वह किशोर सड़क पर फूट-फूटकर रोने लगा।
राहत की बात यह रही कि उस मुश्किल घड़ी में एक स्थानीय दुकानदार आगे आया और उसने उनकी मदद की। उस भले इंसान ने उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाया। इस घटना ने उनके जीवन को एक नया नजरिया दिया और उन्हें विश्वास दिलाया कि कठिन समय में ईश्वर किसी न किसी रूप में मदद के लिए जरूर फरिश्ते भेजते हैं।
रियलिटी शो की जीत और बैंक खाते में जमा हुई पुरस्कार राशि
समय का पहिया घूमा और उनकी मेहनत रंग लाई। देश के सबसे बड़े सिंगिंग रियलिटी शो के पहले सीजन में उन्होंने अपनी आवाज के दम पर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ ही उन्हें एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम पुरस्कार राशि मिली। उस दौर में इतनी बड़ी रकम मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने समझदारी दिखाते हुए इस पूरी राशि को बैंक में सुरक्षित जमा कर दिया ताकि भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटा जा सके।
लेकिन यह जीत उनके लिए सिर्फ खुशियां ही नहीं लाई, बल्कि इसके साथ एक नया दौर शुरू हुआ जिसे उन्होंने संगीत जगत का कड़वा सच बताया है। शो जीतने के बाद उन्हें लगा था कि उनके लिए प्लेबैक सिंगिंग के रास्ते हमेशा के लिए खुल जाएंगे, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत थी।
"ईगो मसाज इंडस्ट्री की सबसे गलत चीज है। रियलिटी शो के विनर्स को लोग एक तरह का श्राप मानते हैं। वे सोचते हैं कि इसे तो फेम मिल गया, अब इसे क्यों गाने दें? आपके टैलेंट का जजमेंट आपके काम से नहीं बल्कि आपके व्यवहार और सामने वाले के अहंकार से तय होता है।" — अभिजीत सावंत, प्रसिद्ध गायक
संगीत उद्योग की कड़वी सच्चाई और 'ईगो मसाज' का खेल
इंडस्ट्री के अंदरूनी समीकरणों पर खुलकर बोलते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह शो जीतने वाले कलाकारों के साथ भेदभाव किया जाता है। संगीत जगत के कई लोग रियलिटी शो के विजेताओं को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं। उन्हें लगता है कि विजेता बनने के बाद कलाकार के पास पर्याप्त पैसा और शोहरत आ चुकी है, इसलिए उसे रियायत या विशेष अवसरों की जरूरत नहीं है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आज भी उन्हें काम के लिए खुद पहल करनी पड़ती है, हालांकि अब उन्होंने इसमें कमी कर दी है। फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने के लिए केवल अच्छी गायकी काफी नहीं होती, बल्कि वहां के नियमों और समीकरणों में फिट बैठना जरूरी माना जाता है, जो कई बार प्रतिभाशाली कलाकारों के लिए मानसिक रूप से थका देने वाला होता है।
बदलते दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ताकत
परंपरागत फिल्म संगीत और प्लेबैक सिंगिंग के एकाधिकार पर वार करते हुए इस दिग्गज कलाकार ने आज की नई पीढ़ी को एक नया रास्ता दिखाया है। उनका मानना है कि अब कलाकारों को सिर्फ फिल्मों के भरोसे बैठने की कोई जरूरत नहीं है। आज के डिजिटल युग में कई ऐसे मंच मौजूद हैं जहां आप अपनी प्रतिभा को सीधे दुनिया के सामने रख सकते हैं।
यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिंगर्स ने प्लेबैक सिंगिंग को बहुत बड़ा हवा बना दिया है, जबकि असलियत में ऐसा कुछ नहीं है। आप खुद अपनी धुनें तैयार कर सकते हैं, अपनी रचनाधर्मिता दिखा सकते हैं और सीधे अपने श्रोताओं से जुड़ सकते हैं। उनका यह सफर इस बात की मिसाल है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि आपके अंदर सच्ची लगन है, तो आप हर बाधा को पार कर अपनी मंजिल पा सकते हैं।







