उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर देश की सुर्खियों में है। मृतका के माता-पिता ने न्याय की मांग को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। हाल ही में अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने प्रशासन के सामने अपनी पांच मुख्य मांगें रखी हैं। परिवार का आरोप है कि इस मामले के असली और बड़े गुनाहगारों को अभी तक बचाया जा रहा है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर देवभूमि में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में नया विवाद तब शुरू हुआ जब अंकिता के माता-पिता ने सिक्किम के राज्यपाल की हालिया नियुक्ति को लेकर विरोध जताया। परिवार का कहना है कि जिस व्यक्ति पर इस मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं, उसे ऐसा पद मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। माता-पिता ने चेतावनी दी है कि यदि यह नियुक्ति रद्द नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इस चेतावनी के बाद राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
माता-पिता की हिरासत और देशभर में आंदोलन की चेतावनी
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया था। हालांकि बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने उन्हें तुरंत छोड़ दिया। हिरासत से बाहर आने के बाद पिता वीरेंद्र भंडारी ने बेहद गुस्से में बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो इस आंदोलन को उत्तराखंड से निकालकर पूरे देश में फैलाया जाएगा। पीड़ित परिवार का यह तेवर अब एक बड़े राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
इस बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने भी इस मामले में खुलकर अपनी बात रखी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि अंकिता के न्याय की यह लड़ाई न कभी दबेगी और न ही रुकेगी। उन्होंने कहा कि पूरा देश शोकसंतप्त परिवार के साथ खड़ा है और दोषियों को सजा मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। राहुल गांधी के इस बयान के बाद इस मामले पर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
वीआईपी का नाम छिपाने और मुख्य आरोपियों पर बड़ा घमासान
अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुरुआत से ही उस तथाकथित वीआईपी के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। परिजनों और स्थानीय लोगों का सवाल है कि वह वीआईपी कौन था जिसका जिक्र अंकिता की चैट में सामने आया था। पुलिस और सरकार पर लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए बड़े चेहरों को बचाया जा रहा है। यही वजह है कि आज भी आम जनता और न्याय प्रिय लोग इस मामले की सीबीआई जांच या उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि स्थानीय लोग और विभिन्न संगठन पीड़ित परिवार के समर्थन में लगातार रैलियां कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बेटी को न्याय दिलाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी स्थिति को संभालने के लिए लगातार नजर बनाए हुए हैं। लेकिन जिस तरह से परिवार ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ेगा।
न्याय की आस में भटकता परिवार और जनता का आक्रोश
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, गांव से लेकर शहर तक हर आम नागरिक की जुबान पर अब सिर्फ एक ही सवाल है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर एक साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी पूरी सच्चाई सामने क्यों नहीं आ सकी। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है लेकिन उनकी हिम्मत टूटने का नाम नहीं ले रही है। वे हर मंच से अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं और जनता का भारी समर्थन उन्हें मिल रहा है।
अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन पीड़ित पिता की इन पांच मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या सिक्किम के राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर कोई प्रशासनिक फेरबदल होता है या फिर विरोध प्रदर्शन और तेज होंगे। हमारी टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पल-पल की जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी। न्याय की इस जंग में हर एक सच को सामने लाना ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।




