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एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम

नागोया एशियन गेम्स के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाते हुए कई पदक अपने नाम किए। मिक्स्ड रिले और वुशू में रजत पदक के साथ भारत का कुल मेडल काउंट 17 तक पहुंच गया है, जबकि कई अन्य स्पर्धाओं में एथलीटों ने फाइनल का टिकट कटा लिया है।
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24 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम
📷 एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम और वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता।
  • एथलेटिक्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में सीमा कुमारी ने कांस्य पदक जीतकर 16 साल का सूखा खत्म किया।
  • पुरुष हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को 8-2 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी।

नागोया एशियन गेम्स में भारतीय दल का जलवा, पांचवें दिन झोली में आए कई अहम पदक

जापान के नागोया में आयोजित हो रहे महाद्वीपीय खेलों का पांचवां दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बेहद उत्साहजनक रहा। देश के एथलीटों ने विभिन्न स्पर्धाओं में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते हुए पदक तालिका को मजबूती दी है। शुरुआती पांच दिनों के भीतर ही भारत के पदकों का कुल आंकड़ा 17 तक पहुंच चुका है। निशानेबाजी से लेकर ट्रैक एंड फील्ड और कॉम्बैट स्पोर्ट्स तक, हर मोर्चे पर भारतीय खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखा है। खेल जानकारों का मानना है कि इस बार का अभियान पिछले संस्करणों की तुलना में काफी संतुलित और प्रभावी रहा है, जहां पारंपरिक ताकत के अलावा नए क्षेत्रों में भी सफलता मिल रही है।

इस बहु-खेल महाकुंभ में भारत की ओर से लगातार नए सितारे उभर कर सामने आ रहे हैं। शुरुआती बाधाओं को पार करते हुए भारतीय दल अब मेडल टैली में शीर्ष पोजीशन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। खेल मंत्रालय और विभिन्न खेल महासंघों द्वारा खिलाड़ियों को दी जा रही आधुनिक ट्रेनिंग का असर अब मैदान पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से मिक्स्ड टीम इवेंट्स और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का मानसिक संयम और आक्रामक रुख देखने लायक रहा है।

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मिक्स्ड रिले और वुशू में आया सिल्वर, सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर में रचा इतिहास

दिन के सबसे रोमांचक मुकाबलों में भारतीय एथलेटिक्स टीम ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। कड़े मुकाबले के बीच भारतीय धावकों ने बेहतरीन समन्वय और रफ्तार का परिचय देते हुए रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, कॉम्बैट स्पोर्ट्स वुशू में स्टार खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता साबित की। हालांकि वह स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार थीं और फाइनल में उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके नाम सिल्वर मेडल दर्ज हुआ। रोशिबिना का यह लगातार तीसरा एशियन गेम्स मेडल है, जो उनकी निरंतरता को बयां करता है।

दूसरी ओर, लंबी दूरी की धावक सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। इस स्पर्धा में भारत को पूरे 16 साल के लंबे अंतराल के बाद कोई पदक हासिल हुआ है। सीमा की इस ऐतिहासिक सफलता ने देश के एथलेटिक्स जगत में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। कोचों का कहना है कि उनकी यह मेहनत आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी।

"खिलाड़ियों ने जिस दृढ़ संकल्प और जुझारूपन का परिचय दिया है, वह वाकई सराहनीय है। हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि हर स्पर्धा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है।" — राष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच

हॉकी में कोरियाई टीम पर बरसे भारतीय खिलाड़ी, दर्ज की 8-2 की प्रचंड जीत

मैदान पर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने आक्रामक खेल से दर्शकों का दिल जीत लिया। मजबूत मानी जाने वाली दक्षिण कोरियाई टीम के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन पासिंग, ड्रिबलिंग और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की शानदार कला का प्रदर्शन किया। कोरियाई डिफेंस पूरी तरह से चरमरा गया और वे भारतीय आक्रमण को रोकने में पूरी तरह असफल रहे। आखिरकार, भारत ने यह मुकाबला 8-2 के विशाल अंतर से अपने नाम कर लिया।

हॉकी टीम की इस धमाकेदार जीत से सेमीफाइनल की राह और अधिक आसान हो गई है। कोच और कप्तान दोनों ने ही टीम के इस प्रदर्शन पर संतोष जताया है, लेकिन साथ ही खिलाड़ियों को आगामी मुकाबलों में आत्ममुग्ध न होने की चेतावनी भी दी है। टूर्नामेंट के इस चरण में भारतीय टीम का गोल अंतर और फिटनेस लेवल दोनों ही बेहतरीन स्थिति में हैं, जो किसी भी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।

ट्रैक और रिंग में भी भारतीय चुनौती मजबूत, कई खिलाड़ियों ने कटाया अगले दौर का टिकट

ट्रैक इवेंट्स में देश के युवा स्प्रिंटर्स ने भी उम्मीद की नई किरण दिखाई है। पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर ने अपने-अपने हीट मुकाबलों में शानदार टाइमिंग के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। दोनों ही धावकों ने जिस गति से दौड़ पूरी की, उससे यह उम्मीद बंध गई है कि वे पदक की रेस में कड़ा मुकाबला पेश करेंगे। इसके अलावा, मुक्केबाजी के रिंग में परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65 किलोग्राम भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ली है। उन्हें शुरुआती दौर में वॉकओवर का फायदा मिला, जिससे वह सीधे अगले दौर में पहुंच गई हैं।

हालांकि, हर मोर्चे पर सफलता नहीं मिली और कुछ निराशाजनक पल भी देखने को मिले। तलवारबाजी में अनुभवी भवानी देवी और श्रेया गुप्ता अपनी चुनौती को आगे नहीं बढ़ा सकीं और बाहर हो गईं। इसके अलावा, जिम्नास्टिक के वॉल्ट फाइनल में देश की एकमात्र प्रतिनिधि प्रणति नायक ने शीर्ष आठ में जगह तो बनाई, लेकिन पोडियम फिनिश करने से मामूली अंतर से चूक गईं और छठा स्थान हासिल किया। मुक्केबाज सुमित कुंडु को भी घुटने में चोट लगने के कारण अपना मुकाबला बीच में ही छोड़ना पड़ा, जो भारतीय दल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

निष्कर्ष: आने वाले दिनों में और मेडल की उम्मीद

एशियन गेम्स के शुरुआती पांच दिनों का सफर यह साबित करने के लिए काफी है कि भारतीय खेल संस्कृति अब तेजी से बदल रही है। पारंपरिक खेलों के साथ-साथ नए और चुनौतीपूर्ण खेलों में भी हमारे युवा एथलीट वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ेंगे, पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत होने की पूरी संभावना है। देश की करोड़ों निगाहें अब अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए हमारे जांबाज मैदान में उतरेंगे।

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