नई दिल्ली/इस्लामाबाद — अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक बार फिर पाकिस्तान की बौखलाहट खुलकर सामने आ गई है। भारत की सख्त और प्रभावी कूटनीतिक नीतियों से परेशान होकर अब पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने नया पैंतरा चलना शुरू कर दिया है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ हुई बैठक में जनरल मुनीर ने एक बार फिर पुराना और घिसा-पिटा कश्मीर राग अलापा। भारत के खिलाफ वैश्विक मंचों पर समर्थन जुटाने की यह कोशिश दर्शाती है कि नई दिल्ली के लगातार कूटनीतिक दबाव से इस्लामाबाद के हुक्मरां किस कदर डरे हुए हैं।
कूटनीतिक गलियारों से मिल रही खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर का यह दौरा पूरी तरह से भारत के बढ़ते वैश्विक रसूख को काउंटर करने की हताशा भरा प्रयास था। भारत ने हाल के वर्षों में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर पाकिस्तान को हर स्तर पर अलग-थलग कर दिया है। इसी का नतीजा है कि अब पाकिस्तानी सेना प्रमुख को खुद सामने आकर संयुक्त राष्ट्र के चक्कर काटने पड़ रहे हैं ताकि वैश्विक समुदाय का ध्यान देश के अंदरूनी गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से भटकाया जा सके।
पाकिस्तानी सेना में अंदरूनी कलह और शहबाज शरीफ के विदेश दौरों पर तंज
एक तरफ जहां जनरल मुनीर संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के भीतर ही सेना और सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लगातार विदेश दौरों से सेना प्रमुख के करीबी अधिकारी खासे नाराज बताए जा रहे हैं। सेना के भीतर से बिना नाम लिए प्रधानमंत्री के इन दौरों पर तंज कसे जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की सत्ता की असली कमान संभालने वाले आसिम मुनीर और निर्वाचित प्रधानमंत्री के बीच पर्दे के पीछे खींचतान अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल का दौर भी जारी है। हाल ही में जनरल मुनीर ने कई महत्वपूर्ण कोर कमांडरों के तबादले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की सैन्य संस्कृति में सेवानिवृत्ति के बाद भी थ्री-स्टार जनरलों और रणनीतिक पदों पर बैठे लोगों का दखल कम नहीं होता है। सेना प्रमुख अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए ऐसे चेहरों को आगे ला रहे हैं जो सीधे तौर पर उनके प्रति वफादार हों, ताकि किसी भी संभावित आंतरिक बगावत या तख्तापलट के खतरे को पहले ही कुचला जा सके।
संसद से भी ऊपर हुए ‘फेल्ड मार्शल’ जैसी चर्चाएं और सऊदी अरब के फैसले
पाकिस्तानी मीडिया और राजनीतिक हलकों में इन दिनों जनरल आसिम मुनीर के बढ़ते रुतबे को लेकर तीखी चर्चाएं हो रही हैं। कई विश्लेषक तो इसे उनका सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं, जहां वे देश की संसद और संविधान से भी ऊपर खुद को स्थापित करते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उन्हें व्यंग्यात्मक रूप से ‘फेल्ड मार्शल’ तक कहा जाने लगा है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ हाल ही में हुए आर्थिक और रक्षा समझौतों में भी सेना प्रमुख की सीधी दखलंदाजी रही है, जिससे यह साफ होता है कि देश की विदेश नीति और आर्थिक फैसले अब रावलपिंडी के जनरल हाउस से ही तय हो रहे हैं।
जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तान की अवाम महंगाई और बदहाली की मार झेल रही है, लेकिन देश का पूरा तंत्र भारत विरोध और सैन्य ताकत के प्रदर्शन पर अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाकर जनरल मुनीर भले ही घरेलू जनता और अपनी फौज को खुश करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के प्रयासों को अब कोई खास तवज्जो नहीं मिल रही है। भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर किसी बाहरी दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की कूटनीतिक चालें
द फ्रीलान्स की इस विशेष पड़ताल से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि पाकिस्तान की सेना भारत के बढ़ते आर्थिक और सामरिक कद से बुरी तरह सहमी हुई है। चाहे वह संयुक्त राष्ट्र में गिड़गिड़ाना हो या फिर देश के भीतर प्रधानमंत्री के दौरों पर सेना की नाराजगी जताना हो, हर कदम पर पाकिस्तानी तंत्र की कमजोरी ही उजागर हो रही है। आने वाले दिनों में भारत अपनी आक्रामक और स्पष्ट विदेश नीति के जरिए पाकिस्तान के इन कुप्रचारों का कूटनीतिक स्तर पर और मजबूती से जवाब देता रहेगा, जिससे इस्लामाबाद के हुक्मरानों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ना तय माना जा रहा है।





