वर्तमान समय में देश के भीतर सामाजिक बदलाव और अधिकारों की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। इसी कड़ी में स्थानीय स्तर पर युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों को एकजुट करने का सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सातों धरमपुर गांव में भीम आर्मी भारत एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज के पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, शिक्षा के महत्व को समझाना और रोजगार के अवसरों पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जिन्होंने पूरे उत्साह के साथ वक्ताओं की बातों को सुना।
शिक्षा और रोजगार के बिना समाज का विकास असंभव
बैठक की शुरुआत में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के आधुनिक युग में यदि किसी समाज को आगे बढ़ना है, तो शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। जब तक युवा शिक्षित नहीं होंगे, तब तक उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिल पाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे परिवार हैं जो आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में संगठन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज के ऐसे मेधावी और जरूरतमंद बच्चों की मदद करे। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तलाशने और कौशल विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
इसके अलावा, चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि समाज में फैली बेरोजगारी से निपटने के लिए युवाओं को पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नए क्षेत्रों में हाथ आजमाना होगा। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ स्वरोजगार और तकनीकी शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन चुकी है। वक्ताओं ने आह्वान किया कि गांवों के स्तर पर युवाओं को करियर काउंसलिंग और मार्गदर्शन मिलना चाहिए ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
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संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु देश का संविधान और लोकतांत्रिक मूल्य रहे। वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित संविधान ही वह ताकत है जो देश के हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देती है। आज के दौर में संविधान पर हो रही चर्चाओं और इसके संरक्षण की जरूरत पर विशेष प्रकाश डाला गया। उपस्थित लोगों को यह समझाया गया कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब आम नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी पूरी तरह सजग रहें।
वक्ताओं ने बहुजन महापुरुषों के संघर्षों और उनके इतिहास को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में बराबरी का हक दिलाने के लिए भारी कठिनाइयों का सामना किया था। उनके विचारों को घर-घर तक पहुंचाना ही आज के कार्यकर्ताओं का मुख्य धर्म होना चाहिए। बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे समाज के हर वर्ग को संविधान के प्रति जागरूक करेंगे और किसी भी स्तर पर होने वाले अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
"समाज में वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब शिक्षा की रोशनी हर घर तक पहुंचेगी। हमें अपने महापुरुषों के सपनों का भारत बनाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा और संविधान प्रदत्त अधिकारों को समझना होगा।" — स्थानीय वक्ता एवं संगठन पदाधिकारी
संगठन का विस्तार और युवाओं को नई जिम्मेदारियां
कार्यक्रम के दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इस मौके पर विभिन्न गांवों से आए युवाओं और जागरूक नागरिकों को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। उनकी सक्रियता और समाज सेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें संगठन में अलग-अलग पदों की नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। नए पदाधिकारियों का वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और तालियों के साथ स्वागत किया।
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नए सदस्यों से अपेक्षा जताई कि वे अपनी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और गांव-गांव जाकर संगठन की नीतियों तथा विचारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक धरातल पर काम मजबूत नहीं होगा, तब तक बड़ी सामाजिक लड़ाइयां नहीं जीती जा सकतीं। इसलिए हर कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र में एक मजबूत कड़ी बनकर काम करना होगा.
गांव-गांव तक पहुंचेगी सामाजिक जागरूकता की मुहिम
बैठक के अंत में भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। तय किया गया कि इस तरह के जन-जागरूकता अभियानों को केवल एक गांव तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आसपास के अन्य गांवों में भी ऐसी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। महिलाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से इन अभियानों से जोड़ने की योजना बनाई गई ताकि वे अपने अधिकारों को लेकर और अधिक मुखर हो सकें।
कार्यक्रम का समापन आपसी भाईचारे, संगठन की एकजुटता और देश के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ के साथ हुआ। इस बैठक ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचलों में भी अब लोग अपने अधिकारों को लेकर कितने जागरूक हो रहे हैं और एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए किस प्रकार एकजुट होकर आगे आ रहे हैं।






