बिहार दरोगा भर्ती परीक्षा पर मंडराया नया संकट, प्रारंभिक परीक्षा को लेकर बढ़ा विवाद
बिहार में पुलिस महकमे में दरोगा के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया इन दिनों लगातार विवादों के घेरे में बनी हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले जाने-माने शिक्षाविद गुरु रहमान के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में छात्र और अभ्यर्थी राजधानी पटना में स्थित आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के कार्यालय जा पहुंचे। छात्रों का यह प्रतिनिधिमंडल परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े पुख्ता सबूत लेकर अधिकारियों से मिला। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का साफ कहना है कि जब तक पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से नए सिरे से आयोजित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान छात्रों के साथ आए प्रमुख चेहरों में रमांशू मिश्रा, सौरभ कुमार, बिकेश कुमार भट्ट, सुमन यादव और चंदन कुमार जैसे युवा शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सेंधमारी हुई है, जिससे योग्य और मेहनती युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से तैरने लगे थे, तो उसी समय इस पर सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए था। लेकिन आयोग की तरफ से तब मनमाने तरीके से परिणाम जारी कर दिए गए, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्नों और परीक्षा पत्र की सच्चाई
छात्रों और शिक्षकों का दावा है कि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई थी। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब अभ्यर्थियों ने अपने हाथ में प्रश्न पत्र देखे, तो वे पूरी तरह से उन पत्रों से मेल खा रहे थे जो इम्तिहान से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे। उस वक्त भी परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही छात्रों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था और परीक्षा रद्द करने की पुरजोर मांग उठाई थी। हालांकि, उस समय प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और मनमाने ढंग से आगे की चयन प्रक्रिया को बढ़ा दिया गया।
शिक्षाविद गुरु रहमान ने मीडिया और अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते हुए दो टूक कहा कि प्रथम दृष्टया ही यह साबित हो गया था कि प्रश्न पत्र लीक हो चुके थे। उन्होंने कहा कि मेहनती और रात-दिन एक करने वाले छात्रों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय है।
"हमने आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों को वे सभी दस्तावेज़ और सबूत सौंप दिए हैं, जो इस बात की गवाही देते हैं कि प्रारंभिक परीक्षा में किस स्तर पर धांधली हुई है। हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि इस पूरी बहाली प्रक्रिया को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।" — गुरु रहमान, शिक्षाविद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बार-बार होने वाली गड़बड़ियां न केवल छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं। यही वजह है कि अब छात्र किसी भी कीमत पर चुप बैठने को तैयार नहीं हैं और पारदर्शी जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के शीर्ष अधिकारी का मिला आश्वासन
छात्रों के उग्र प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार जैन ने खुद आगे आकर अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की बातों को बेहद गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि पुलिस महकमा इस मामले की तह तक जाएगा। एडीजी ने छात्रों को याद दिलाया कि जिस तरह से मुख्य परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने पर तुरंत एक्शन लेते हुए उसे रद्द किया गया था, ठीक उसी तर्ज पर प्रारंभिक परीक्षा के दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान यह साबित होता है कि प्रारंभिक परीक्षा के दौरान नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई थी, तो कानून के मुताबिक आगे की कड़ी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने फिलहाल शांति बनाई रखी है, लेकिन उनकी निगाहें पूरी तरह से EOU की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
मुख्य परीक्षा रद्द होने के बाद गहराया असमंजस, क्या दोबारा होगी पूरी प्रक्रिया?
गौरतलब है कि हाल ही में BPSSC की ओर से दरोगा भर्ती की मुख्य (मेन्स) परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया था। कुल 1799 पदों पर होने वाली इस भर्ती परीक्षा को लेकर पहले से ही कई तरह के सवाल उठ रहे थे। परीक्षा केंद्रों पर बार-बार बिजली कटने की समस्या, जैमर बंद रहने की आशंका और अन्य प्रशासनिक चूक के चलते यह परीक्षा विवादों में आई थी। EOU की शुरुआती जांच में कई ऐसे खुलासे हुए थे जिसके बाद मेन्स परीक्षा को रद्द करने का कड़ा निर्णय लेना पड़ा था।
अब जबकि प्रारंभिक परीक्षा में भी धांधली के सबूतों का पिटारा लेकर छात्र EOU दफ्तर पहुंच चुके हैं, तो यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार की इस बहुप्रतीक्षित दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर स्थिति और अधिक सुस्पष्ट होगी। अभ्यर्थियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूरी चयन प्रक्रिया को शून्य घोषित करके नए सिरे से विज्ञापन निकाला जाएगा या फिर चरणबद्ध तरीके से सुधार किए जाएंगे।
भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं पर मंडराता साया और छात्रों की उम्मीदें
बिहार में लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की इन घटनाओं से लाखों युवाओं का मनोबल टूट रहा है। राज्यभर के युवा जो सालों तक कम संसाधनों में रहकर अपनी तैयारी करते हैं, उनके लिए हर बार परीक्षा रद्द होना या उसमें भ्रष्टाचार होना किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं है। शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार और आयोग को अब ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे किसी भी स्तर पर सेंधमारी की गुंजाइश ही न बचे।
फिलहाल, दरोगा भर्ती के इन तमाम अभ्यर्थियों की नजरें आर्थिक अपराध इकाई की चल रही जांच और सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे राज्य स्तर पर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करने के लिए मजबूर होंगे।




