राज्यसभा की अटकलों पर बृजभूषण शरण सिंह का दो टूक जवाब
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीर और चर्चाओं का बाजार गर्म है। कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में चल रही उन चर्चाओं पर खुद विराम लगा दिया है, जिनमें उनके राज्यसभा जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अयोध्या एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने इन सभी कयासों को खारिज कर दिया और अपनी भावी राजनीतिक योजनाओं को लेकर खुलकर बात की।
पिछले दो दिनों से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि पार्टी उन्हें उच्च सदन यानी राज्यसभा भेज सकती है। इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए पूर्व सांसद ने बहुत स्पष्ट लहजे में कहा कि उनका नाम किसी भी सूची में नहीं है और न ही उनकी ऐसी कोई व्यक्तिगत इच्छा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह राज्यसभा के चुनावी रण में बिल्कुल नहीं उतरेंगे।
इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने अपने अगले राजनीतिक कदम का भी ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य साल 2029 का आम चुनाव है। वह सीधे तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और इसके लिए गोंडा या उसके आसपास की किसी सीट को चुनेंगे। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों और खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
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अखिलेश यादव के साथ संबंधों और बयानों पर साफ़ की स्थिति
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच हाल ही में बयानों के जरिए बढ़ी नजदीकियों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। हाल ही में अखिलेश यादव ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि बृजभूषण सिंह से उनके संबंध बहुत अच्छे हैं। इसी सिलसिले में जब पूर्व सांसद से सवाल किया गया तो उन्होंने भी साफ किया कि राजनीति से हटकर उनके व्यक्तिगत संबंध सभी दलों के नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि वह कभी भी किसी व्यक्तिगत टिप्पणी या दुर्भावना के तहत बयानबाजी नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव एक बड़े राजनीतिक दल के नेता हैं और पूर्व में वह समाजवादी पार्टी के साथ भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनके बीच के रिश्तों को सिर्फ राजनीतिक चश्मे से ही देखा जाना उचित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत सम्मान पर भी आधारित होते हैं।
"हमको तो राज्यसभा का चुनाव लड़ना ही नहीं है। मेरा किसी नंबर पर नाम नहीं है। बल्कि 2029 में गोंडा जिले की किसी लोकसभा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ूंगा। अखिलेश जी से हमारे अच्छे संबंध हैं, वे अच्छे व्यक्ति हैं।" — बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व सांसद, भाजपा
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चाएं चल रही हैं कि गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर विभिन्न नेताओं के बयान आ रहे हैं। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी बलिया में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करना है और आपसी तालमेल को मजबूत रखना जरूरी है। ऐसे समय में बृजभूषण सिंह का यह बयान और सपा नेतृत्व के साथ उनके तालमेल की चर्चा राजनीतिक हलकों में नए संकेत दे रही है।
गोंडा और कैसरगंज की राजनीति में सुगबुगाहट तेज
बृजभूषण शरण सिंह का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी स्थानीय निकाय, विधानसभा उप-चुनाव और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन चल रहा है। गोंडा और कैसरगंज क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से अपनी दावेदारी पेश करना यह संकेत देता है कि वह क्षेत्र की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय रहने वाले हैं।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान उनके समर्थकों के बीच एक स्पष्ट संदेश देने के लिए भी महत्वपूर्ण था। पिछले कुछ महीनों में उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों और अन्य विवादों के बीच उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। उच्च सदन की रेस से खुद को बाहर बताकर और सीधे लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करके उन्होंने साफ कर दिया है कि वह जमीनी राजनीति से दूर नहीं जाने वाले हैं।
आने वाले दिनों में उनके इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा सकते हैं। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर उनके अगले कदम को लेकर मंथन होगा, वहीं विरोधी दल भी उनके इस रुख पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। बहरहाल, बृजभूषण सिंह के इस ताजा बयान ने फिलहाल राज्यसभा जाने की तमाम चर्चाओं पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है और अब पूरा फोकस उनके 2029 के चुनावी मैदान पर टिक गया है।








