आम आदमी के आशियाने पर महंगाई की मार, सीमेंट की कीमतों में होगा बड़ा इजाफा
यदि आप आने वाले दिनों में अपना खुद का मकान बनवाने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब का पूरा गणित बिगाड़ सकती है। निर्माण कार्यों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री यानी सीमेंट की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आने वाला है। बाजार से मिल रही अंदरूनी खबरों के मुताबिक, अक्टूबर महीने के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सीमेंट के दाम 5 रुपये से लेकर 20 रुपये प्रति बोरी तक महंगे हो सकते हैं। त्योहारी सीजन की शुरुआत और पितृपक्ष के समापन के ठीक बाद कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है, जिसका सीधा फायदा कंपनियां दाम बढ़ाकर उठाने की तैयारी में हैं।
जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ हफ्तों में लगातार बढ़ी ईंधन की लागत ने सीमेंट निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्पादन और ढुलाई का खर्च महंगा होने के कारण कंपनियों पर मुनाफा बनाए रखने का भारी दबाव है। यही वजह है कि सितंबर में शुरुआती मामूली तेजी के बाद अब अक्टूबर में कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आम मध्यमवर्गीय परिवार, जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, उनके लिए अपने सपनों का घर तैयार कराना अब और अधिक खर्चीला साबित होगा।
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सितंबर में भी सुस्त नहीं रही कीमतें, सभी क्षेत्रों में दर्ज हुई थी बढ़ोतरी
अगर आपको लगता है कि यह बढ़ोतरी अचानक हो रही है, तो आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। इससे ठीक पहले सितंबर के महीने में भी सीमेंट के दामों में लगातार तेजी का रुख देखा गया था। जुलाई और अगस्त के महीनों में कीमतें लगभग स्थिर और शांत बनी हुई थीं, लेकिन सितंबर आते ही बाजार का मिजाज बदल गया। अखिल भारतीय औसत व्यापार मूल्य (ऑल इंडिया एवरेज ट्रेड प्राइस) में महीने-दर-महीने 7 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद यह बढ़कर 356 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
क्षेत्रवार आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सबसे अधिक उछाल दक्षिण भारत के बाजारों में देखने को मिला, जहां सीमेंट की प्रति बोरी कीमत में 11 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, पश्चिमी भारत के राज्यों में उपभोक्ताओं को प्रति बोरी 9 रुपये अधिक चुकाने पड़े। इसके अलावा उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के विभिन्न बाजारों में भी 5 से 5 रुपये प्रति बोरी की मामूली से लेकर तेज बढ़त दर्ज की गई। ट्रेड और नॉन-ट्रेड दोनों ही सेगमेंट में यह तेजी साफ तौर पर महसूस की गई है।
कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती लागत बनी मुख्य वजह
सवाल यह उठता है कि आखिर बार-बार सीमेंट के दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं? सेंट्रम ब्रोकिंग और अन्य वित्तीय विश्लेषण रिपोर्टों के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट में ईंधन की कीमतों में हुआ भारी इजाफा है। सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में भट्ठियों को गर्म रखने और क्लिंकर के निर्माण के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और ईंधन की जरूरत होती है। ऊर्जा संसाधनों के महंगे होने से कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च काफी बढ़ गया है, जिसे पूरा करने के लिए दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बनता जा रहा है।
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि कंपनियों द्वारा बिलिंग मूल्य में की गई बढ़ोतरी का पूरा और तत्काल असर हमेशा अंतिम ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता है। कई स्थानीय बाजारों और डीलरशिप स्तर पर डीलर्स अपने तिमाही बिक्री लक्ष्यों (सेलिंग टारगेट्स) को पूरा करने के लिए पुराने स्टॉक को पुराने दामों पर ही बेचते रहे हैं। लेकिन जैसे ही नया स्टॉक आएगा, ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतें चुकानी ही होंगी।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कड़े प्रतिबंधों का क्या होगा असर?
एक तरफ जहां कीमतें बढ़ने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक पाबंदियां भी निर्माण जगत को प्रभावित करने वाली हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली सरकार ने आने वाले सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए 1 नवंबर से लेकर जनवरी के अंत तक धूल उड़ाने वाली तोड़-फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कुछ हफ्तों तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक भी लग सकती है।
इस स्थिति को लेकर बाजार के विशेषज्ञों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। एक तरफ निर्माण रुकने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सीमेंट की मांग में भारी गिरावट आने की संभावना है। वहीं दूसरी तरफ, देश के बाकी हिस्सों में त्योहारी सीजन के चलते मांग बनी रहेगी। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मांग घटने के बावजूद कंपनियां अपने दाम बढ़ाने के फैसले को बाजार में कितना टिका पाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: निर्माण शुरू करने से पहले करें एडवांस प्लानिंग
मौजूदा हालात को देखते हुए रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने घर बनवाने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि आपने भी आने वाले महीनों में अपने घर की छत डलवाने या निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, तो आपको अभी से ठोस रणनीति बनानी होगी।
"ईंधन की लागत में हालिया तेज बढ़ोतरी और त्योहारी सीजन के कारण मांग में सुधार को देखते हुए सीमेंट कंपनियों के लिए अक्टूबर में दाम बढ़ाना एक रणनीतिक कदम हो सकता है। हालांकि, इन बढ़ी हुई कीमतों का बाजार में टिके रहना पूरी तरह से आगामी महीनों में मांग की रिकवरी पर निर्भर करेगा।" — बाजार विश्लेषक, सेंट्रम ब्रोकिंग
विशेषज्ञों का सुझाव है कि रिटेल ग्राहकों को अपने स्थानीय डीलरों से संपर्क साधकर एडवांस बुकिंग या थोक खरीद पर मोलभाव कर लेना चाहिए। यदि आप समय से पहले सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री का इंतजाम कर लेते हैं, तो अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में संभावित मूल्य वृद्धि के झटके से काफी हद तक बचा जा सकता है।








