मुंबई एयरपोर्ट पर बदला मौसम का मिजाज, 11 उड़ानों के रूट बदले
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे विमान सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। आसमान में छाए घने बादलों और खराब दृश्यता के कारण महानगर में उतरने वाली कुल 11 उड़ानों को सुरक्षा कारणों से आसपास के दूसरे हवाई अड्डों की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। नागर विमानन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रभावित होने वाली उड़ानों में इंडिगो एयरलाइंस की 5, एयर इंडिया की 4 और अकासा एयर तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक-एक उड़ान शामिल थी।
खराब मौसम के चलते एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को तुरंत कड़े कदम उठाने पड़े। दिल्ली, चेन्नई, तिरुचिरापल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और गोवा जैसे प्रमुख शहरों से मुंबई आ रहे विमानों को सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा और नासिक के हवाई अड्डों पर सुरक्षित उतारा गया। अचानक बदले इस मौसम ने हवाई सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं, जिन्हें घंटों विमान के अंदर या एयरपोर्ट लाउंज में इंतजार करना पड़ा। मौसम विभाग का कहना है कि तटीय इलाकों में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
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बिहार में गंडक नदी का कहर, चंपारण तटबंध और कई बांध टूटे
एक तरफ देश के पश्चिमी हिस्से में विमान सेवाएं बाधित हैं, तो दूसरी तरफ पूर्वी राज्य बिहार में नदियां तबाही मचा रही हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद वाल्मीकिनगर और वीरपुर बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। इसके परिणामस्वरूप गंडक नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा और बैरिया प्रखंडों में गंडक के दबाव के आगे चंपारण तटबंध दो अलग-अलग स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय जब तटबंध पर रिसाव शुरू हुआ था, तब उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की पूरी कोशिश की, लेकिन किसी ने फोन तक नहीं उठाया। प्रशासनिक लापरवाही के चलते पानी तेजी से रिहाइशी इलाकों में फैल गया और कई कच्चे-पक्के मकान धाराशायी हो गए। इसके अलावा मोतिहारी में भी दो छोटे बांध टूटने से लगभग 70 से अधिक घरों में पानी भर गया है, जिससे लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ऊंचे स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं।
"रात के वक्त जब बांध में पानी का रिसाव शुरू हुआ तो हमने तुरंत इंजीनियरों को फोन मिलाया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने हमारा फोन नहीं उठाया। अगर समय रहते प्रशासन ने चेतावनी पर ध्यान दिया होता, तो यह तबाही रोकी जा सकती थी।" — स्थानीय ग्रामीण, फुलियाखाड़ पंचायत
छत्तीसगढ़ में इंद्रावती नदी ने तोड़ा 53 साल का रिकॉर्ड
चक्रवाती तूफान के असर से देश के मध्य हिस्से यानी छत्तीसगढ़ में भी मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। बस्तर संभाग में हो रही लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए पिछले 53 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुका है। नदी का जलस्तर बढ़कर 12.39 मीटर तक पहुंच गया है, जिसके चलते जगदलपुर शहर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को तुरंत प्रभाव से हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ प्रभावित और जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित नागरिकों के ठहरने के लिए 65 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें हजारों लोग शरण लिए हुए हैं। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अधिकारी लगातार कैंप कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी मौसम ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश जनित समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बदायूं जिले में लगातार हो रही बरसात के कारण ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग बुरी तरह टूट चुके हैं। सुंदरनगर से बहेटा जबीं को जोड़ने वाली सड़क का एक बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। कानपुर समेत कई अन्य जिलों में भी शहरी जलभराव ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
उधर, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और चूरू जिलों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर साफ तौर पर देखने को मिला है। यहाँ मंगलवार को अचानक मौसम बदलने से तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। इस बेमौसम बदलाव के कारण रात के तापमान में खासी गिरावट आई है और शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम पारा लुढ़ककर 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है, जिससे अक्टूबर की शुरुआत में ही हल्की सर्दी का अहसास होने लगा है।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक देश के कई राज्यों में बारिश का यह दौर जारी रहने की चेतावनी जारी की है। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक फैली इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर बाढ़ सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री समय पर पहुँचाना और टूटे हुए बांधों की युद्ध स्तर पर मरम्मत करना है, ताकि आम जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जा सके।








