त्योहारों के ऐन वक्त पर सरकार का बड़ा तोहफा
त्योहारों का मौसम शुरू होते ही घरों में पकवानों की खुशबू फैलने लगती है। इस दौरान खाने के तेल की मांग बाजार में सबसे ज्यादा होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने आम जनता के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न प्रकार के खाद्य तेलों पर आयात शुल्क यानी बेसिक कस्टम ड्यूटी में सीधी कटौती कर दी गई है। सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी आने की पूरी संभावना है, जिससे हर घर के रसोई बजट पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के इस सीजन में जब मांग अपने चरम पर होती है, तब इस तरह का नीतिगत निर्णय महंगाई की मार झेल रहे मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। पिछले कुछ महीनों से वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर कीमतों में तेजी के कारण आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ रहा था। सरकार की इस नई पहल से घरेलू बाजार में आपूर्ति बेहतर होगी और कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।
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किन तेलों पर कितनी घटी है कस्टम ड्यूटी?
सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के तहत कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर सीधे 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड पाम तेल पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को भी 32.5 प्रतिशत से भारी कमी के साथ 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इन बदलावों का सीधा असर यह होगा कि थोक आयातकों और मिल मालिकों को कम लागत पर तेल मिलेगा, जिसका लाभ अंततः खुदरा उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
सूरजमुखी के तेल के मामले में सरकार ने और भी बड़ा रियायती फैसला लिया है। सूरजमुखी के कच्चे तेल पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 10 प्रतिशत से घटाकर पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर लगने वाले शुल्क को 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत कर दिया गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन दरों में बदलाव से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें उपभोक्ताओं के अनुकूल बन सकेंगी।
वैश्विक बाजार और आयात के आंकड़ों का विश्लेषण
खाद्य तेलों के बाजार पर नजर रखने वाले उद्योग निकायों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के दौरान वैश्विक स्तर पर कीमतों में वृद्धि और रुपये की कमजोरी के कारण वनस्पति तेलों के आयात पर असर पड़ा था। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न कारणों से आयात की मात्रा में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। हालांकि, त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए सरकार का यह समय पर उठाया गया कदम बेहद सराहनीय है।
विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के बीच भारत जैसे विशाल आयातक देश के लिए घरेलू कीमतों को थामना एक बड़ी चुनौती रहता है। आयात शुल्क में कटौती करके सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि देश के भीतर खाद्य तेलों की कोई कमी न हो और कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर न जाएं।
आम जनता की जेब पर क्या होगा सीधा असर?
किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार के लिए त्योहारी सीजन का अर्थ होता है खर्चों में बढ़ोतरी। ऐसे समय में जब खाने-पीने की मुख्य चीजों के दाम नीचे आते हैं, तो सीधे तौर पर राहत महसूस होती है। पूरी, कचौड़ी, मिठाई और अन्य पकवान बनाने में खाद्य तेल की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि तेल के खुदरा दाम कम होते हैं, तो त्योहारों की चमक और मिठास दोनों बरकरार रहती हैं।
"सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम समय की मांग था। त्योहारी सीजन में जब हर घर में तेल की खपत बढ़ती है, तब कस्टम ड्यूटी घटने से उपभोक्ताओं को निश्चित रूप से राहत मिलेगी और जमाखोरी या कृत्रिम महंगाई पर भी लगाम लगेगी।" — बाजार विश्लेषक
कारोबारियों और खुदरा बाजार की प्रतिक्रिया
व्यापार जगत और खुदरा दुकानदारों का कहना है कि ड्यूटी घटने से बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा। थोक विक्रेताओं के पास पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद जब नए शुल्क पर आधारित तेल बाजार में पहुंचेगा, तो खुदरा कीमतों में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है। किराना कारोबारियों का मानना है कि इससे त्योहारी मांग को और अधिक बढ़ावा मिलेगा क्योंकि लोग खुलकर खरीदारी कर सकेंगे।
सरकार की इस नीति का दूरगामी असर यह होगा कि घरेलू बाजार में स्थिरता आएगी और उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। खाद्य तेल हमारी दैनिक जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा है, और इसकी कीमतों में स्थिरता आने से पूरे बाजार में एक सकारात्मक संदेश जाता है।








