शामली में चंद्रशेखर आजाद का सरकार पर तीखा प्रहार
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकारों की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। खराब मौसम और तेज बारिश के बावजूद जुटे हजारों समर्थकों के बीच उन्होंने देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्ग के सामने आ रही गंभीर चुनौतियों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले कई वर्षों से शासन चला रहे लोगों ने सिर्फ वादे किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आम जनता के हाथ निराशा के अलावा कुछ नहीं लगा है।
इस सम्मेलन के दौरान उन्होंने खास तौर पर उन मुद्दों को उठाया जो सीधे तौर पर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। बेरोजगारी, महंगाई, बदहाल शिक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत और भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के सपनों को तोड़ कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि आज का युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद दर-दर भटकने को मजबूर है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में नेताओं के बच्चों की हो अनिवार्यता
अपनी आक्रामक शैली के लिए पहचाने जाने वाले चंद्रशेखर आजाद ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में असमानता पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक क्रांतिकारी मांग रखते हुए कहा कि देश के सभी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चों की शुरुआती और उच्च शिक्षा केवल सरकारी स्कूलों में ही होनी चाहिए। इसी तरह, उनके इलाज की व्यवस्था भी आम जनता की तरह सरकारी अस्पतालों में ही की जानी चाहिए।
"यदि देश के नीति निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे और उनके परिवार सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएंगे, तो व्यवस्था में सुधार खुद-ब-खुद हो जाएगा। तब अधिकारियों को समझ आएगा कि आम आदमी किन परेशानियों से जूझ रहा है।" — चंद्रशेखर आजाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आजाद समाज पार्टी
उन्होंने आगे कहा कि गरीब और अमीर के बच्चों के बीच शिक्षा के स्तर में जो खाई पैदा कर दी गई है, उसे पाटना बेहद जरूरी है। बीटेक, एमबीए, और अन्य महंगे प्रोफेशनल कोर्स अब केवल संपन्न वर्ग की पहुंच में रह गए हैं, जबकि गरीब परिवार का युवा आर्थिक तंगी के कारण इन सपनों को पूरा नहीं कर पाता है। सरकारी शिक्षण संस्थानों की बदहाली दूर करके ही हर वर्ग के नागरिक को समानता का अधिकार दिया जा सकता है।
पेपर लीक और बेरोजगारी पर सरकार से कड़े सवाल
युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में भर्ती परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होना एक लाइलाज बीमारी बनता जा रहा है। रात-दिन मेहनत करने वाले छात्र जब परीक्षा देने जाते हैं और बाद में पर्चा लीक होने की खबर सुनते हैं, तो उनका पूरा मनोबल टूट जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि युवाओं का सिस्टम से भरोसा न उठे।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपने घरों और परिवारों से दूर दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे महानगरों में कम वेतन पर नौकरियां करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सरकारों को स्थानीय स्तर पर ऐसे औद्योगिक और रोजगारपरक अवसर पैदा करने चाहिए ताकि युवाओं को पलायन न करना पड़े। इसके अलावा, उन्होंने पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों और संविदा कर्मचारियों के मानदेय और उनकीJOB सुरक्षा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।
किसानों की बदहाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग
देश के अन्नदाता की स्थिति पर बात करते हुए आजाद ने कहा कि किसानों को केवल कागजी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार द्वारा दी जाने वाली किसान सम्मान निधि को उन्होंने नाकाफी बताते हुए कहा कि इसे महीने के हिसाब से देखने पर यह बहुत मामूली राशि साबित होती है। असली जरूरत किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम देने की है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों को पहचानें और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
कानून-व्यवस्था और दमनकारी नीतियों के खिलाफ विरोध
प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई और पुलिसिया एनकाउंटर की संस्कृति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उन नीतियों और प्रणालियों से है जो गरीब और कमजोर तबके के लोगों को निशाना बनाती हैं। उन्होंने अपने पुराने संघर्षों और जेल यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि तमाम मुश्किलों के बाद भी उन्होंने जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ना नहीं छोड़ा है।
अंत में उन्होंने वहां मौजूद सभी समर्थकों और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने मताधिकार की ताकत को समझें। लोकतंत्र में वोट की चोट से ही गलत नीतियों को बदला जा सकता है। खराब मौसम और भारी बारिश के बीच भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि अब जनता अपने हक के प्रति जागरूक हो चुकी है और बदलाव चाहती है।






