स्मार्ट क्लास बनी मनोरंजन का अड्डा, वायरल वीडियो ने खोली पोल
बिहार के गया जिले से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। वजीरगंज प्रखंड अंतर्गत आने वाले उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय जमुआवां में आधुनिक संसाधनों का किस हद तक दुरुपयोग हो रहा है, इसकी एक बानगी वायरल हुए वीडियो से मिलती है। इस विद्यालय के स्मार्ट क्लास रूम में पठन-पाठन की जगह मनोरंजन और डांस का दौर चलने लगा। जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो शिक्षा विभाग के गलियारों में खलबली मच गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय स्तर के उच्च अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि डिजिटल शिक्षा के लिए स्थापित किए गए स्मार्ट क्लास का इस्तेमाल किस प्रकार मनमाने ढंग से किया जा रहा था। इस पूरी घटना ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली और अनुशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है।
विभाग के अनुसार, इस तरह की अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। स्मार्ट क्लास का उद्देश्य ग्रामीण इलाके के बच्चों को तकनीक से जोड़कर बेहतर शिक्षा देना था, लेकिन जब कक्षाएं ही नियमों के दायरे से बाहर हो जाएं, तो कार्रवाई होना लाजिमी है। इसी कड़ी में सबसे पहले विद्यालय के मुखिया यानी प्रधानाध्यापक पर गाज गिरी है।
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परीक्षा के मध्यांतर में छात्रों ने किया था भोजपुरी गानों पर नृत्य
प्राप्त जानकारी और विभागीय जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा वाकया 21 सितंबर का है। उस दिन विद्यालय में परीक्षाएं आयोजित की जा रही थीं और परीक्षा अवधि का मध्यांतर (इंटरवल) चल रहा था। इसी दौरान तीन छात्रों ने स्मार्ट क्लास के अंदर प्रवेश किया और कथित तौर पर भोजपुरी गानों की धुन पर जमकर डांस किया। न सिर्फ छात्रों ने इस दौरान अनुशासन की सारी हदें पार कीं, बल्कि इसका वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया गया जो बाद में इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चाएं तेज हो गईं और मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे बिना किसी रोक-टोके के छात्र स्कूल की डिजिटल संपत्ति और कमरे का इस्तेमाल अपने मनोरंजन के लिए कर रहे थे। विद्यालय परिसर के अंदर इस तरह की गतिविधियों का संचालन यह साबित करने के लिए काफी था कि संस्थान में अनुशासन का स्तर कितना गिर चुका है।
छात्रों द्वारा इस प्रकार की हरकत किए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) की संयुक्त टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की स्थलीय जांच की। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि विद्यालय के भीतर छात्रों पर किसी भी प्रकार का प्रभावी नियंत्रण नहीं रखा जा रहा था।
प्रधानाध्यापक रंजन कुमार पर गिरी निलंबन की गाज
जांच रिपोर्ट के आधार पर मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक ने उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय जमुआवां के प्रधानाध्यापक रंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी किए गए आदेश के अनुसार, प्रधानाध्यापक पर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर ही प्रशासनिक नियंत्रण में पूरी तरह विफल रहने का गंभीर आरोप प्रथम दृष्ट्या प्रमाणित पाया गया है।
निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की लचर कार्यप्रणाली के कारण पूरे शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हुई है। बिहार राज्य उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रधानाध्यापक नियमावली के प्रावधानों के तहत यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान प्रधानाध्यापक रंजन कुमार का मुख्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
इस पूरी कार्रवाई से जिले के अन्य विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि यदि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासनहीनता पाई गई या बच्चों की निगरानी में कोताही बरती गई, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी ऐसा ही सख्त रुख अपनाया जाएगा।
शिक्षकों के बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी का भी खुलासा
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, विद्यालय के अंदर की कई अन्य परतें भी उधड़कर सामने आने लगीं। जांच रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से जिक्र किया गया है कि जमुआवां स्कूल के शिक्षकों के बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी चरम पर है। स्कूल के भीतर शिक्षकों का दो गुटों में बंटा होना और एक-दूसरे के प्रति असहयोग की भावना होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी थी।
इसके साथ ही, स्मार्ट क्लास के संचालन की जिम्मेदारी जिन शिक्षकों के पास थी, उनकी भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, विद्यालय के स्मार्ट क्लास के नोडल शिक्षक रविरंजन कुमार और संध्या साव हैं। जांच रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया कि नोडल शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के बीच समन्वय की कमी के कारण ही ऐसी घटनाएं पनप रही थीं।
"विद्यालय परिसर के भीतर इस प्रकार की अनुशासनहीनता और स्मार्ट क्लास जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कतई स्वीकार्य नहीं है। प्रधानाध्यापक का दायित्व है कि वे स्कूल में शैक्षणिक माहौल और अनुशासन बनाए रखें, जिसमें वे प्रथम दृष्ट्या असफल पाए गए हैं।" — क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, मगध प्रमंडल
विभाग अब इस मामले में शामिल अन्य शिक्षकों और जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका की भी गहराई से पड़ताल कर रहा है। अनुशासनिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए नवादा के डीपीओ (स्थापना) को संचालन पदाधिकारी और वजीरगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस पूरे प्रकरण की आगे की जांच प्रक्रिया को पूरा करेंगे।
निष्कर्ष और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया
गया के जमुआवां स्कूल का यह मामला शिक्षा जगत में एक गंभीर चेतावनी की तरह है। एक तरफ जहां सरकार स्कूलों को डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक निगरानी की कमी इन प्रयासों पर पानी फेर देती है। स्मार्ट क्लास का मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया जाना और उसका वीडियो वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर शिक्षकों और प्राचार्यों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
विभाग द्वारा की गई यह कड़ी कार्रवाई अन्य विद्यालयों के लिए एक कड़ा संदेश है कि लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कुछ और शिक्षकों के आने की भी संभावना जताई जा रही है, क्योंकि रिपोर्ट में विद्यालय की आंतरिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिक्षा विभाग का यह कदम भले ही एक स्कूल विशेष से जुड़ा हो, लेकिन यह पूरे राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।






