राहुल गांधी के डिजिटल सत्याग्रह अभियान पर सियासी पारा गरम
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए नए 'डिजिटल सत्याग्रह' कैंपेन को लेकर राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से इस नए राजनीतिक प्रयोग पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान इस मंच को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने जहां एक तरफ युवाओं को अपनी बात रखने के लिए डिजिटल मंच दिए जाने की वकालत की, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को कड़ी नसीहत भी दे डाली।
चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष को जनता के मूड को समझने की जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज की तारीख में देश की जनता कांग्रेस और उसके सहयोगियों को लगातार नकार रही है। इस जमीनी हकीकत को स्वीकार करने के लिए किसी बड़े सत्याग्रह की नहीं, बल्कि गहरे आत्ममंथन की आवश्यकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
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युवाओं और नागरिकों को मंच देने की सोच अच्छी, लेकिन नीयत पर सवाल
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राहुल गांधी की इस पहल के सकारात्मक पहलू पर भी बात की। उन्होंने माना कि देश के युवाओं और आम नागरिकों को अपनी समस्याएं उठाने के लिए अधिक से अधिक लोकतांत्रिक और डिजिटल मंच मिलने चाहिए। इसी सोच के तहत यदि राहुल गांधी ने सत्याग्रह की शुरुआत की है, तो सैद्धांतिक रूप से इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि केवल अच्छे नाम चुन लेने से या डिजिटल कैंपेन चला लेने से जमीन पर जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता।
पासवान ने कहा कि विपक्ष की आदत बन गई है कि वे हर मुद्दे को उठाते हैं और फिर बिना किसी तार्किक निष्कर्ष के उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। ईवीएम से लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट के एसआईआर (SIR) जैसे मुद्दों पर जनता के बीच भ्रम फैलाने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे अभियानों का सहारा ले रहा है, जबकि असलियत यह है कि आम जनता ने इन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
'आप चुनाव जीत जाएं तो सब सही, हार जाएं तो एसआईआर पर सवाल'
चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर चिराग पासवान ने बहुत तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। पासवान ने सवाल उठाया कि जब चुनाव परिणाम उनके पक्ष में आते हैं, तो वही प्रक्रिया और वही एसआईआर बिल्कुल सही और पारदर्शी प्रतीत होते हैं। लेकिन जैसे ही एनडीए या अन्य दल चुनाव जीतते हैं, पूरी व्यवस्था और मशीनरी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए जाते हैं.
"आप चुनाव जीत जाते हैं, तो वहां का एसआईआर सही रहता है। वहीं, अगर हमारे सांसद जीतते हैं, तो वह प्रक्रिया गलत हो जाती है। जहां हमारी सरकारें आती हैं, वहां गड़बड़ी नजर आती है, लेकिन जिन राज्यों में आपके मुख्यमंत्री हैं, वहां सब ठीक रहता है। सत्याग्रह की सोच अच्छी है, तो कम से कम सच बोलें और जनता को भ्रमित न करें।" — चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री
उन्होंने आगे कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस या उसके सहयोगियों की सरकारें हैं, वहां की व्यवस्थाओं पर वे कभी सवाल नहीं उठाते, बल्कि दूसरे राज्यों में अपनी हार का ठीकरा हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ते हैं। यह प्रवृत्ति देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है और विपक्ष को इस संकीर्ण मानसिकता से बाहर आना होगा।
मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों पर पलटवार, दी खुली चुनौती
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा देश के चुनावों को कथित तौर पर गैरकानूनी करार दिए जाने वाले बयान पर भी चिराग पासवान ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को वाकई यह लगता है कि देश की पूरी चुनाव प्रणाली गैरकानूनी है, तो वे तुरंत इसे कानूनी रूप से रद्द करवाने का कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि खरगे साहब के लंबे राजनीतिक अनुभव का हर कोई सम्मान करता है, लेकिन ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान जनता में भ्रम पैदा करते हैं।
पासवान ने आगे कहा कि कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले खरगे को अपनी पार्टी के सांसदों और उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करनी चाहिए, जहां उनकी सरकारें चल रही हैं। क्या उनके सांसद और मुख्यमंत्री इस बात के लिए तैयार हैं कि देश के चुनाव रद्द करवा दिए जाएं? उन्होंने कहा कि विरोध और बयानबाजी सिर्फ मीडिया में बने रहने के लिए की जाती है, जबकि असलियत में कोई भी पार्टी इन प्रक्रियाओं से बाहर नहीं जाना चाहती।
आरक्षण के मुद्दे पर दो टूक, कहा- यह एक पक्का अधिकार
देश में इन दिनों चल रहे आरक्षण से जुड़े विवादों और बहसों पर भी केंद्रीय मंत्री ने अपनी स्थिति एकदम साफ कर दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षण देश के वंचित और शोषित वर्ग का एक संवैधानिक अधिकार है। इस पर किसी भी तरह के विवाद या भ्रम की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती है। सरकारें और समाज इस अधिकार की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि विपक्ष के पास आज की तारीख में जनता के कल्याण के लिए कोई ठोस सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है। यही वजह है कि कभी डिजिटल सत्याग्रह के नाम पर तो कभी बयानों के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। जनता सब देख रही है और आने वाले समय में ऐसे राजनीतिक पैतरों का जवाब बैलेट बॉक्स के जरिए ही मिलेगा।





