नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेताओं ने अपनी गिरफ्तारी और 24 घंटे की हिरासत के बाद सरकार को खुली चेतावनी दी है। पार्टी के प्रमुख चेहरे आशुतोष रांका और सौरव दास ने रिहा होते ही अपने तीखे तेवर दिखा दिए हैं। इन नेताओं का साफ कहना है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने दिल्ली पुलिस और प्रशासन को साफ शब्दों में कह दिया है कि वे प्रदर्शन के लिए नई तारीख खुद तय करके बताएं।
बीते कुछ दिनों से जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सीजेपी का विरोध प्रदर्शन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पिछले दिनों पुलिस ने इन नेताओं को हिरासत में ले लिया था जिसके बाद राजनीति और गरमा गई। हिरासत से बाहर आते ही आशुतोष रांका ने ऐलान किया कि उनके पास संघर्ष जारी रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि अगर अगले चौबीस घंटों के भीतर उनकी मांगों और प्रदर्शन की अनुमति पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
थानों के चक्कर और नया राजनीतिक संग्राम
हिरासत से छूटने के तुरंत बाद सौरव दास और आशुतोष रांका सीधे थाने पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सरकार और पुलिस मिलकर उनकी आवाज को दबाना चाहती है। सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली के अंदर हालात अघोषित आपातकाल जैसे बनते जा रहे हैं, जहां किसी भी विरोधी स्वर को तुरंत जेल में डाल दिया जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक चेहरों का भी समर्थन CJP को मिलता दिख रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वांगचुक ने सरकार को चेतावनी दी है कि नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उनकी बात सुनी जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की दमनकारी नीतियों से जनता की आवाज को ज्यादा दिनों तक नहीं दबाया जा सकता है, और दिल्ली में बढ़ता असंतोष किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
पुलिस प्रशासन की चुनौतियां और अगला कदम
एक तरफ जहां कॉकरोच जनता पार्टी के नेता लगातार 24 घंटे का अल्टीमेटम दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस यह तय करने में जुटी है कि इन नेताओं के अगले कदम से शहर की शांति और यातायात व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है। खुफिया विभाग भी इस बात पर नजर बनाए हुए है कि CJP के इस नए आंदोलन में कौन-कौन से नए संगठन या चेहरे जुड़ सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों और आम जनता की बात करें तो इस तरह के लगातार विरोध प्रदर्शनों से रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का कोई ऐसा रास्ता निकले जिससे शहर की शांति भी बनी रहे और किसी के अधिकारों का हनन भी न हो। CJP नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका 24 घंटे का समय पूरा होने के बाद वे अपने अगले बड़े राजनीतिक कदम का ऐलान मीडिया के सामने करेंगे।
सोनम वांगचुक का समर्थन और बढ़ता दायरा
इस पूरे विवाद में सोनम वांगचुक की एंट्री ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। वांगचुक के बयानों के बाद देश के दूसरे हिस्सों से भी युवा और कार्यकर्ता CJP के समर्थन में खड़े होने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते बातचीत का जरिया नहीं अपनाया, तो यह स्थानीय विरोध एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और पल-पल की जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।









