नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़ा एक बड़ा मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। सिटिजन्स फॉर पीस एंड जस्टिस यानी सीजेपी के दो प्रमुख नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामला तब और गरमा गया जब इस घटनाक्रम पर युवा नेता और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके का पहला आधिकारिक रिएक्शन सामने आया। अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से प्रायोजित और दमनकारी करार दिया है।
अभिजीत दिपके ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि सौरभ दास और आशुतोष रांका को इस बात का पूरा अंदेशा था कि उनके साथ क्या होने वाला है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पहले से ही पता था कि सरकार और प्रशासन उनके खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। दिपके के मुताबिक, सीजेपी के ये नेता किसी भी नतीजे के लिए पूरी तरह तैयार थे क्योंकि वे सच की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आवाज दबाने के लिए इस तरह की नीतियां अपनाई जा रही हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल खिलाफ हैं।
तिरंगा फहराने के विवाद पर गरमाई राजनीति
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब इन युवा नेताओं द्वारा तिरंगा फहराने के कार्यक्रम के बाद प्रशासन ने अचानक सख्त रुख अपनाया। आरोप है कि एक सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और अपने विचार रखने के नाम पर इन युवाओं को निशाना बनाया गया। सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष के तमाम बड़े चेहरे खुलकर इनके समर्थन में उतर आए हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह तक ने इस गिरफ्तारी को खुलेआम कायरता बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि देश में तिरंगा फहराना या अपने अधिकारों की बात करना अब जुर्म बना दिया गया है।
तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद से सौरभ दास और आशुतोष रांका के समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर भी युवा कार्यकर्ता इस गिरफ्तारी के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कानूनी दांव-पेंच आने वाले दिनों में और ज्यादा तेज हो सकते हैं। सीजेपी संगठन का कहना है कि वे इन दमनकारी नीतियों के आगे बिल्कुल नहीं झुकेंगे और अपनी कानूनी तथा लोकतांत्रिक लड़ाई को हर हाल में आगे बढ़ाएंगे।
अभिजीत दिपके के तीखे तेवर और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
अभिजीत दिपके ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का खुला आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आज देश में जो कोई भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसे जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है। दिपके ने दो टूक शब्दों में कहा कि सौरभ और आशुतोष ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया था, बल्कि उन्होंने केवल अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तिरंगा फहराना इस देश में अब अपराध की श्रेणी में आ गया है, जिसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
जमीनी स्तर पर इस घटना के बाद से सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी कर दी गई है। तिहाड़ जेल के बाहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पूरी कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है और दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में कोर्ट के अगले कदमों पर भी हमारी पैनी निगाह रहेगी।





