पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से परेशान वाहन चालक
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से लोगों का मोहभंग होता जा रहा है और वे अधिक किफायती विकल्पों की तलाश में हैं। ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे और सरकार के नए ई-20 फ्यूल संबंधी दिशा-निर्देशों के चलते आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। ऐसे में बाजार के जानकारों का मानना है कि सीएनजी तकनीक अब देश के मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ा और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। सड़क पर चलने वाले हर दूसरे वाहन चालक के मन में यही सवाल है कि आखिर इस महंगाई के दौर में गाड़ी चलाना कैसे किफायती रखा जाए।
पारंपरिक ईंधन की बढ़ती लागत के कारण कार खरीदार अब ऐसे वाहनों की तलाश कर रहे हैं जो कम खर्च में ज्यादा माइलेज दें। सीएनजी कारों ने इस मोर्चे पर खरीदारों की उम्मीदों को पूरी तरह से पूरा किया है। यही वजह है कि देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियों के शोरूम में पेट्रोल वेरिएंट के मुकाबले सीएनजी मॉडल्स की पूछताछ और बुकिंग में जबरदस्त तेजी आई है। कंपनियों ने भी ग्राहकों के इस बदलते रुझान को देखते हुए अपने लगभग सभी लोकप्रिय मॉडल्स के फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी वर्जन बाजार में उतार दिए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर माइलेज के साथ-साथ कंपनी फिटेड वारंटी का भरोसा भी मिल रहा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के ताजा आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो वाहन खरीदारों की पसंद में यह बदलाव बहुत साफ नजर आता है। हाल ही में समाप्त हुए महीने के दौरान देश भर में सीएनजी से चलने वाली कुल 1,05,249 पैसेंजर गाड़ियों का डिस्पैच किया गया है। पिछले साल की समान अवधि के आंकड़ों से तुलना करें तो यह संख्या महज 72,062 यूनिट्स पर सिमटी थी। इस लिहाज से देखा जाए तो एक साल के भीतर ही सीएनजी वाहनों की बिक्री में लगभग 46.1 प्रतिशत की शानदार और अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय उपभोक्ता अब अपनी गाड़ी के मेंटेनेंस और रनिंग कॉस्ट को लेकर बेहद जागरूक हो चुके हैं।
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बाजार में मारुति और टाटा की गाड़ियों का जलवा
देश के सीएनजी कार बाजार में मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियों का दबदबा पूरी तरह कायम है। इन कंपनियों ने अपने किफायती और भरोसेमंद इंजनों के दम पर ग्राहकों के दिलों में खास जगह बनाई है। कॉम्पैक्ट कारों से लेकर एसयूवी सेगमेंट तक, हर जगह सीएनजी विकल्प उपलब्ध होने की वजह से ग्राहकों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। कंपनी फिटेड सीएनजी किट होने के कारण लोगों को बाहर से किट लगवाने के झंझट और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से भी मुक्ति मिल गई है, जिससे इन गाड़ियों की मांग में लगातार उछाल आ रहा है।
खास तौर पर मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए सीएनजी गाड़ियाँ बजट के लिहाज से एकदम सटीक बैठती हैं। शहर के भीतर रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले लोग हों या फिर कमर्शियल इस्तेमाल करने वाले ड्राइवर, सभी के लिए सीएनजी ईंधन काफी किफायती साबित हो रहा है। पेट्रोल की तुलना में सीएनजी की कीमतें काफी कम होने के कारण वाहन चलाने की लागत आधी से भी कम रह जाती है। यही वजह है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मंदी के तमाम कयासों के बीच सीएनजी सेगमेंट लगातार नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है और कंपनियों के मुनाफे को भी रफ्तार दे रहा है।
"भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में सीएनजी की यह रिकॉर्ड तोड़ बिक्री इस बात का संकेत है कि देश का आम नागरिक अब स्मार्ट मोबिलिटी की तरफ कदम बढ़ा चुका है। रनिंग कॉस्ट कम होने के कारण लोग अब पारंपरिक ईंधन के बजाय सीएनजी को प्राथमिकता दे रहे हैं।"— ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ, द फ्रीलान्स
सबसे ज्यादा बिकने वाले टॉप सीएनजी मॉडल्स
बिक्री के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मारुति सुजुकी और टाटा की कुछ खास गाड़ियों ने इस सेगमेंट में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लिस्ट में सबसे ऊपर मारुति अर्टिगा का नाम आता है, जिसके सीएनजी वेरिएंट की कुल 13,352 यूनिट्स बेची गईं। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसमें मामूली एक फीसदी की गिरावट जरूर आई है, लेकिन यह अभी भी देश की सबसे चहेती फैमिली सीएनजी कार बनी हुई है। इसके बाद मारुति डिजायर का जलवा देखने को मिला, जिसकी कुल 12,963 यूनिट्स बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत अधिक है।
सैलरीड क्लास और छोटे परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय मारुति वैगन आर के सीएनजी वेरिएंट की 9,405 यूनिट्स डिस्पैच की गईं, जो पिछले साल से 34 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा, कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में टाटा पंच के सीएनजी मॉडल ने बाजार में तहलका मचा दिया है। टाटा पंच सीएनजी की कुल 7,767 यूनिट्स बिकीं, जिसमें पिछले साल की तुलना में पूरे 102 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं मारुति ब्रेजा के सीएनजी वेरिएंट ने भी 7,608 यूनिट्स की बिक्री के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए 31 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।
भविष्य में और बढ़ सकता है सीएनजी का दायरा
आने वाले समय में सीएनजी कारों की मांग और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है क्योंकि देश भर में गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। हर छोटे-बड़े शहर में सीएनजी पंपों की संख्या बढ़ने से लोगों को ईंधन भरवाने में लंबी लाइनों से छुटकारा मिल रहा है। इसके अलावा सरकार भी देश में ग्रीन फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब अपनी प्रीमियम गाड़ियों में भी सीएनजी का विकल्प देना शुरू कर चुकी हैं, जिससे भविष्य में इस सेगमेंट का दायरा और ज्यादा विस्तृत होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती महंगाई ने वाहन चालकों को एक बेहतर और किफायती विकल्प की तलाश करने पर मजबूर कर दिया था। सीएनजी ने उस जरूरत को बिल्कुल सटीक तरीके से पूरा किया है। आज के समय में जब हर कोई अपने घर के बजट को संतुलित रखना चाहता है, तब सीएनजी कारें मध्यम वर्ग के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही हैं। आने वाले महीनों में भी ऑटोमोबाइल बाजार के इस ट्रेंड के ऐसे ही जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।



