भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऐतिहासिक क्रांति, ग्लोबल मार्केट में छाए ई-स्कूटर्स
देश के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तो तेजी से बढ़ ही रही है, लेकिन अब भारतीय ई-स्कूटर्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपना परचम लहराना शुरू कर दिया है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं। वैश्विक स्तर पर पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और किफायती मोबिलिटी विकल्पों की तलाश के बीच, मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक स्कूटर्स विदेशी ग्राहकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में भारतीय दोपहिया निर्माताओं ने निर्यात के मोर्चे पर जो सफलता हासिल की है, वह देश के औद्योगिक विकास में एक नए मील का पत्थर साबित हो रही है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि घरेलू स्तर पर कड़ा मुकाबला और तकनीकी नवाचार ने भारतीय कंपनियों को इस काबिल बना दिया है कि वे वैश्विक मानकों पर खरी उतर सकें। यही वजह है कि दुनियाभर के कई देशों में भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की डिमांड में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को दिए जा रहे प्रोत्साहन और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।
संबंधित खबरें
निर्यात में 450 प्रतिशत का भारी उछाल, आंकड़ों ने चौंकाया
ऑटोमोबाइल सेक्टर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) के दौरान देश से इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के निर्यात में पिछले साल की तुलना में पूरे 450 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस समयावधि में भारतीय कंपनियों ने कुल 15,418 इलेक्ट्रिक स्कूटर दूसरे देशों को भेजे हैं। अगर इसकी तुलना पिछले साल की समान अवधि से करें, तो यह आंकड़ा महज 2,807 यूनिट्स पर सिमटा हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक साधारण बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। घरेलू बाजार में भी इस दौरान शानदार ग्रोथ देखने को मिली है, जहां शुरुआती पांच महीनों में 791,325 इलेक्ट्रिक स्कूटर बिक चुके हैं, जो कि सालाना आधार पर 114 प्रतिशत की मजबूत बढ़त को दर्शाता है।
टीवीएस और बजाज की ग्लोबल मार्केट में जबरदस्त दहाड़
विदेशी बाजारों में भारतीय कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस निर्यात सूची में सबसे ऊपर टीवीएस मोटर कंपनी का नाम है। कंपनी ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कुल 6,702 इलेक्ट्रिक स्कूटर विदेशों में एक्सपोर्ट किए हैं। पिछले साल इसी दौरान टीवीएस ने 1,850 यूनिट्स ही भेजी थीं, यानी कंपनी ने शानदार 262 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ हासिल की है। कंपनी का पॉपुलर मॉडल 'टीवीएस आईक्यूब' इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा ड्राइवर साबित हुआ है।
दूसरी ओर, बजाज ऑटो ने इस मोर्चे पर सबसे हैरान करने वाला प्रदर्शन किया है। बजाज ने इस अवधि के दौरान 4,818 यूनिट्स का निर्यात किया है, जबकि पिछले साल इसी दौर में यह आंकड़ा महज 218 यूनिट्स था। यह सालाना आधार पर 2194 प्रतिशत की छलांग है, जो कंपनी की आक्रामक वैश्विक रणनीति को उजागर करता है। बजाज चेतक ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत धाक जमाई है।
एथर एनर्जी और अन्य ब्रांड्स ने भी बढ़ाई रफ्तार
सिर्फ स्थापित दिग्गज ही नहीं, बल्कि नई उम्र के तकनीकी ब्रांड्स ने भी ग्लोबल मार्केट में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। एथर एनर्जी ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कुल 3,573 इलेक्ट्रिक स्कूटर्स का निर्यात किया है। पिछले साल यह संख्या 742 यूनिट्स थी, जिससे कंपनी को 382 प्रतिशत की मजबूत सालाना ग्रोथ मिली है। एथर के 450 और रिज्टा मॉडल्स को विदेशी खरीदारों से काफी सराहना मिल रही है।
इसके अलावा, ग्रीव्स इलेक्ट्रिक ने 169 यूनिट्स और हीरो मोटोकॉर्प (विडा) ने 135 यूनिट्स का निर्यात किया है। एम्पीयर जैसे ब्रांड्स ने भी वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है। इन आंकड़ों से साफ है कि आने वाले दिनों में भारतीय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ग्लोबल मार्केट के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
"भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने साबित कर दिया है कि वे न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं, बल्कि वैश्विक गुणवत्ता के मामले में भी दुनिया को टक्कर दे रहे हैं। ई-स्कूटर्स के निर्यात में यह उछाल देश की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट
भविष्य की संभावनाएं और ग्लोबल मार्केट की चुनौतियां
भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर उद्योग के लिए आगे का रास्ता काफी संभावनाओं से भरा हुआ है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देशों में किफायती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां कम लागत में बेहतरीन रेंज, आधुनिक फीचर्स और टिकाऊ बैटरी तकनीक मुहैया कराने में सफल रही हैं, जिससे इन बाजारों में उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करना एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन जिस तरह से भारतीय स्टार्टअप्स और दिग्गज कंपनियां आरएंडडी (शोध और विकास) में निवेश कर रही हैं, उससे यह तय माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ग्लोबल हब बनकर उभरेगा।








