नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रस्तावित प्रदर्शन और मार्च को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन या मार्च के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में डीसीपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक रुख पर विस्तृत जानकारी साझा की है। वीडियो में साफ तौर पर सुना जा सकता है कि पुलिस प्रशासन ने बिना अनुमति के होने वाले किसी भी जमावड़े या मार्च को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और कानून का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।
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इंटरनेट और जमीनी प्राथमिक पड़ताल से सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जंतर-मंतर 2.0 और संसद मार्च के आह्वान के बाद से ही दिल्ली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। द वायर और ज़ी न्यूज़ सहित कई प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि प्रदर्शनकारियों को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और भारी पुलिस बल तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद यूजर्स और आम जनता के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोग प्रशासनिक सुरक्षा और एहतियाती कदमों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन के हकों को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। बहरहाल, दिल्ली पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी में कानून और व्यवस्था से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और निषेधाज्ञा का सख्ती से पालन कराया जाएगा।




