नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि इस संभावित विरोध प्रदर्शन या मार्च के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है और राष्ट्रीय राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) द्वारा जारी किए गए एक वीडियो बयान में डीसीपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के मार्च या विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है, और पुलिस कानून का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए तैयार है।
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इंटरनेट और जमीनी प्राथमिक पड़ताल से मिले तथ्यों के अनुसार, 'जंतर-मंतर 2.0' के बैनर तले होने वाले इस प्रदर्शन और संसद मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने एहतियातन बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती की है। कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू कर दी गई है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस घटनाक्रम और डीसीपी सचिन शर्मा के बयान का वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स और आम जनता के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोग प्रशासनिक सख्ती को जरूरी बता रहे हैं, वहीं कुछ हलकों में लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन के हकों को लेकर बहस छिड़ गई है। बहरहाल, पुलिस ने राजधानी में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा चक्र को और अधिक मजबूत कर दिया है।




