नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आज राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच गई जब आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा। जंतर-मंतर की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकालने की कोशिश कर रहे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और विधायक सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोक लिया। भारी धक्का-मुक्की और जोर-आजमाइश के बाद पुलिस ने इन सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया और सुरक्षित स्थानों पर ले गई।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे सांसद संजय सिंह ने हिरासत में जाने से ठीक पहले केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। संजय सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि आज देश की राजधानी दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि पुलिस बल का दुरुपयोग करके जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। आप नेताओं का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है।
प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी और बड़े मुद्दों की मांग
विरोध प्रदर्शन और तनाव के बीच सांसद संजय सिंह ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस चिट्ठी के जरिए उन्होंने देश और दिल्ली के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संजय सिंह ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस बल का इस्तेमाल बंद होना चाहिए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए असहमतियों का सम्मान करना बेहद जरूरी है, लेकिन मौजूदा सरकार विपक्ष की हर आवाज को कुचलने पर तुली हुई है।
दूसरी ओर, राजधानी के कई इलाकों में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि उनके शीर्ष नेतृत्व को इस तरह से जबरन रोकना तानाशाही का स्पष्ट उदाहरण है। पुलिस अधिकारियों का हालांकि यह पक्ष रहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और इलाके में धारा 144 या निषेधाज्ञा का पालन करवाने के लिए यह एहतियाती कदम उठाना जरूरी था। सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर रखा है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
INDIA गठबंधन का मार्च और इमरजेंसी जैसे हालात का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ आम आदमी पार्टी ही नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के अन्य घटक दलों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार देश की संवैधानिक संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग कर रही है। दिल्ली की सड़कों पर निकले प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस तरह से चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हिरासत में लिया जा रहा है, वह देश के संघीय ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि अगर जनता के अधिकारों का दमन इसी तरह जारी रहा तो आंदोलन को और ज्यादा व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
जमीन पर स्थिति अब भी काफी तनावपूर्ण बनी हुई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है। हालांकि प्रशासनिक अमले का यह भी दावा है कि शहर में आम नागरिकों को किसी प्रकार की बड़ी असुविधा न हो, इसके लिए ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य जरूरी उपाय किए गए हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं और राहगीरों को राहत देने के लिए कुछ इलाकों में यातायात को सुचारू करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि विरोध प्रदर्शनों के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित न हो।
प्रशासनिक कदम और आगे की राजनीतिक रणनीति
एक तरफ जहां पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कानून व्यवस्था संभालने में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी और विपक्ष ने अपनी अगली रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। नेताओं की हिरासत के बाद पार्टी कार्यालय में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें आगे के कानूनी और राजनीतिक कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे इस दमनकारी नीति के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ जनता के बीच भी जाएंगे।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम जब जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों का जायजा लेने पहुंची, तो वहां भारी सुरक्षा पहरा दिखाई दिया। आम लोगों और दुकानदारों में इस अचानक उपजे राजनीतिक तनाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। बहरहाल, संजय सिंह की चिट्ठी और नेताओं की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली का सियासी पारा काफी हाई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।









