दिल्ली के सीमापुरी इलाके में हुआ एक बड़ा हादसा अब तक पांच लोगों की जान ले चुका है। यहाँ एक चार मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभरा कर नीचे गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती राहत और बचाव कार्य के दौरान मलबे से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, जैसे-जैसे मलबा हटाया गया, मौत का आंकड़ा बढ़ता चला गया। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर घनी बस्तियों में बने पुराने और जर्जर मकानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह हादसा इतनी जल्दी हुआ कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। इमारत के गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। लोगों ने अपने स्तर पर मलबे में दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की। कुछ ही देर में पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान भी वहां पहुंच गए। भारी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है ताकि फंसे हुए अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
भूकंप के बाद कमजोर हुई थी इमारत
प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के बयानों से सामने आया है कि कुछ दिन पहले आए भूकंप के झटकों के बाद इस इमारत में दरारें आ गई थीं। यह मकान पहले से ही काफी पुराना और कमजोर था। भूकंप के कारण इसकी नींव और दीवारें हिल चुकी थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने इमारत की हालत को लेकर चिंता भी जताई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार कमजोर हो चुकी यह इमारत अचानक ढह गई और पांच बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ गई।
हादसे का शिकार हुए परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। मृतकों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है, जिसके जाने से पूरे इलाके में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन को घनी बस्तियों में बने ऐसे खतरनाक मकानों का सर्वे करना चाहिए। समय रहते जर्जर इमारतों को खाली नहीं कराया गया तो ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे।
घनी बस्तियों में पुराने भवनों की सुरक्षा पर सवाल
सीमापुरी की इस घटना ने दिल्ली के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों की सच्चाई को उजागर कर दिया है। संकीर्ण गलियों में बने ये मकान बिना किसी नक्शे या तकनीकी देखरेख के खड़े हैं। इनमें से अधिकांश भवन दशकों पुराने हैं और अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। जरा सा भी कंपन या दबाव इन्हें गिराने के लिए काफी साबित होता है। प्रशासन के पास इन अवैध और जर्जर मकानों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं होता है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है.
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद इस पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी। इमारत के मालिक और निर्माण से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल होगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागना प्रशासन की मजबूरी बन गया है?
बचाव अभियान और घायलों का इलाज जारी
मौके पर मौजूद डॉक्टरों और अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, मलबे से निकाले गए घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका इलाज जारी है और कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम घायलों को बचाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ, दमकल कर्मी और बचाव दल आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने के लिए मलबे के हर एक हिस्से को सावधानी से हटा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की टीम लगातार जमीनी स्तर पर बनी हुई है और इस हादसे से जुड़े हर नए अपडेट पर नजर रख रही है। प्रशासन की तरफ से अभी राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले घंटों में यह साफ हो पाएगा कि मलबे के नीचे अब कोई और फंसा है या नहीं। इस तरह के हादसों से बचने के लिए शहर के हर पुराने इलाके में सुरक्षा जांच अभियान चलाना बेहद जरूरी हो गया है।




